बिहार के सरकारी विद्यालय अब केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के मॉडल संस्थान के रूप में भी विकसित होंगे।
शिक्षा विभाग ने जिले के सरकारी विद्यालयों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर रूफटॉप) लगाने की नई योजना शुरू की है।
प्रथम चरण के लक्ष्य
इस योजना के पहले चरण में जिले के उच्च विद्यालय, आदर्श विद्यालय और पीएम श्री विद्यालयों को सौर ऊर्जा से लैस किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से जिले के सभी सरकारी स्कूलों की छतों पर सोलर प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
सही छत की सूची
प्राथमिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा के डीपीओ दीपक कुमार सिन्हा ने सभी बीईओ से मजबूत छत वाले विद्यालयों की सूची मांगी है।
बीईओ को प्राथमिकता के आधार पर दो दिनों के भीतर सूची उपलब्ध कराने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
ब्रेडा करेगा क्रियान्वयन
योजना का पूरा क्रियान्वयन बिहार नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (BREDA) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए भवन निर्माण निगम के कार्यपालक अभियंता को भी सूची का अनुमोदन कर विभाग को भेजने की जिम्मेदारी दी गई है।
स्मार्ट क्लास में मदद
विद्यालयों में सोलर प्लांट लगने से बिजली कटौती की समस्या दूर होगी और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को बड़ा फायदा मिलेगा।
इससे स्मार्ट कक्षा, कंप्यूटर लैब और डिजिटल बोर्ड को निर्बाध रूप से चलाया जा सकेगा।
बिजली बिल में बचत
सौर ऊर्जा उत्पादन से सामान्य बिजली पर निर्भरता कम होगी, जिससे विद्यालयों के बिजली बिल में काफी बचत होगी। यदि किसी स्कूल में आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पन्न होती है, तो उसे सीधे विद्युत ग्रिड में भेजने की व्यवस्था भी होगी।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता
सौर ऊर्जा के प्रयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके साथ ही स्कूली विद्यार्थियों में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

