मेरठ में औद्योगिक गलियारा परियोजना अटकी, किसानों का विरोध और प्रशासनिक सुस्ती बनी वजह

 सरकार प्रदेश को उद्योग प्रदेश बनाने में जुटी है, लेकिन यह अभियान मेरठ जनपद में ठिठक गया है। यहां 800 हेक्टेयर क्षेत्रफल में औद्योगिक गलियारा बसाने की तैयारी है, लेकिन अभी तक केवल पहले चरण के लिए 214 हेक्टेयर में से 192 हेक्टेयर जमीन ही मिल सकी है।

दूसरे चरण के लिए चिह्नित 292 हेक्टेयर जमीन का क्रय प्रस्ताव डेढ़ साल में भी तैयार नहीं हो सका है, जबकि तीसरे चरण के लिए 300 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित करने का कार्य भी पूरा नहीं हो सकी है। दोनों काम तहसील द्वारा किए जाने हैं। अफसर किसानों के विरोध को बाधा बता रहे हैं, जबकि शासन अफसरों को लापरवाह मानते हुए बार बार क्रय प्रस्ताव की मांग कर रहा है।

प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे समेत सभी छह औद्योगिक एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा विकसित किए जा रहे हैं। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे भी सभी 12 जनपदों में औद्योगिक गलियारा बसाने का काम चल रहा है।

मेरठ में जमीन की लोकेशन देशी और विदेशी नामचीन कंपनियों को पसंद आ रही है। यही कारण है कि मेरठ में लगभग 800 हेक्टेयर जमीन में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी की गई है।

अभी तक केवल प्रथम चरण में 214 हेक्टेयर जमीन की खरीद हो सकी है। जिसपर यूपीडा ने एजेंसी का चयन करके विकास कार्य भी शुरू करा दिए हैं, लेकिन इसके बाद यहां औद्योगिक विकास का सिलसिला थम सा गया है।

दूसरे चरण के लिए तीन गांवों की 292 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित करके उसके अधिग्रहण की घोषणा अक्टूबर 2024 में की गई। जिसका क्रय प्रस्ताव आज तक भी यूपीडा को नहीं भेजा जा सका है।

यूपीडा इसके लिए बार बार पत्र भेज रहा है। तीसरे चरण के लिए यूपीडा ने जनवरी 2026 में जिला प्रशासन से 200 से 300 हेक्टेयर भूमि को चिह्नित करके प्रस्ताव मांगा था। यह प्रस्ताव भी तैयार नहीं किया जा सका है।

नाम किसानों के विरोध का, अफसर छिपा रहे लापरवाही

दूसरे चरण के लिए जमीन देने से तीनों गांवों के किसानों ने साफ इंकार करते हुए धरना शुरू कर दिया था। धरना आज भी जारी है। किसानों का कहना है कि वे छोटे छोटे किसान है। जमीन दे दी तो बेरोजगार हो जाएंगे। लिहाजा किसी कीमत पर भी जमीन नहीं देंगे।

किसानों के इस विरोध के पीछे ही अधिकारी अपनी लापरवाही छिपा रहे हैं। विरोध को देखते हुए यूपीडा ने नलकूप, भवन, पेड़ आदि संपत्तियों को छोड़कर केवल जमीन का क्रय प्रस्ताव मांगा था, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा सके।

तहसील प्रशासन ने दिसंबर 2025 में जो क्रय प्रस्ताव बनाकर भेजा वह भी आधा अधूरा था, जिसमें 9 आपत्तियां लगाकर मंडलायुक्त ने वापस भेज दिया था, इन आपत्तियों का समाधान तहसील प्रशासन छह महीने में भी नहीं कर सका है।

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