भारत के औषधि नियामक ने व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली रेबीज वैक्सीन “अभयरब” के एक बैच को मानकों के अनुरूप नहीं पाया है। इसे घटिया और संभवत: नकली बताया है।
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) के अनुसार, वैक्सीन का एक नमूना पोटेंसी टेस्ट (असरदार होने की जांच) में विफल रहा। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में हर साल करीब छह हजार लोगों की रेबीज से मौत होती है।
कंपनी के उपाध्यक्ष सुनील तिवारी ने कहा कि मुताबिक ये डोज दिल्ली के मुखर्जी नगर स्थित एक बिना लाइसेंस वाले आवासीय परिसर से पकड़ी गई थीं।
बता दें कि आईआइएल घरेलू रैबीज वैक्सीन बाजार में 40% हिस्सेदारी रखती है। केंद्रीय औषधि नियामक ने कहा कि इस बैच का कोई हिस्सा विदेश निर्यात नहीं किया गया था और मामले में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
नियामक ने राज्यों को इस बैच की बिक्री और वितरण पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश भी दिए हैं।
कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला में नमूने की जांच के दौरान पोटेंसी आवश्यकताओं में कमी पाई गई। लेबल, पैकेजिंग, क्यूआर कोड, कैप के रंग और लाइसेंस संबंधी विवरण में भी अंतर मिला।
आईआईएल ने कहा कि मूल बैच की 83,370 डोज अधिकृत चैनलों के जरिए वितरित की गई थीं और अस्पतालों तथा लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों से आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि नियामक को पूरा बैच रिकार्ड उपलब्ध करा दिया गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

