साहब! कभी ऐसी बाढ़ नहीं आई, दुकानदारों ने अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर सुनाई तबाही की दास्तां
‘साहब, वर्ष 2003 में भी बाढ़ आई थी, लेकिन ऐसी तबाही कभी नहीं देखी।’ रामघाट में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे एडीजी प्रयागराज जोन ज्योति नारायण के सामने दुकानदारों की आंखों में आंसू थे और हाथ मदद की उम्मीद में जुड़े थे।
वहीं, तुलसी पूजन बर्तन के दुकानदार खुशीराम ने रोते हुए बताया कि बाढ़ से करीब 60 से 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। अनुराग अग्रवाल ने कहा कि घर और दुकान में पानी भरने के बाद सोने तक की जगह नहीं बची।
दुकानदारों के मुताबिक, रामघाट की मुख्य सड़क के करीब 70 प्रतिशत दुकानदारों ने अपनी दुकानों का बीमा तक नहीं कराया है। केवल लगभग 30 प्रतिशत दुकानदार ही बीमा के दायरे में हैं। ऐसे में बाढ़ से हुआ नुकसान उनके लिए और बड़ा संकट बन गया है। उन्होंने प्रशासन से सर्वे कराकर आर्थिक मदद दिलाने की मांग की।
एडीजी ने मंगलम बेकरी, तुलसी पूजन बर्तन और अग्रसेन भवन समेत कई स्थानों पर पहुंचकर नुकसान देखा। उन्होंने दुकानदारों को हरसंभव प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया। साथ ही मंदाकिनी के जलस्तर की हर घंटे निगरानी, घाटों पर बैरिकेड और निचले क्षेत्रों में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए।
जलस्तर अस्थिर होने के कारण श्रद्धालुओं के स्नान और नदी किनारे आवागमन पर रोक जारी है। मंडलायुक्त अजीत कुमार और डीआइजी राजेश एस, एएसपी पीयूषकांत राय, क्षेत्राधिकारी नगर सत्येंद्र सिंह, कर्वी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अभय राज सिंह और सीतापुर चौकी प्रभारी यदुवीर सिंह यादव रहे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

