गंगा के रौद्र रूप की आहट: जल संसाधन विभाग ने बिहार के सभी DM-SP को किया अलर्ट, भेजा चेतावनी संदेश

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 बिहार में गंगा समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि के बीच बाढ़ का खतरा और गंभीर हो गया है। जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता ब्रजेश मोहन ने गंगा के जलस्तर को लेकर चेतावनी जारी की है।

पटना के गांधी घाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 50.51 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से 1.91 मीटर ऊपर है। जलस्तर में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति बनी हुई है।

गंगा गांधी घाट पर अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर के बेहद करीब पहुंच गई है। पूर्वानुमान के अनुसार यहां गंगा नया उच्चतम जलस्तर बना सकती है।

ऐसे में नदी के प्रवाह क्षेत्र, विशेषकर दियारा इलाकों में दबाव और बढ़ने की आशंका है। विभाग ने संबंधित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने और आवश्यक ऐहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया है।

तटबंध किनारे बसे लोगों को सतर्क करने का निर्देश

जल संसाधन विभाग ने तटबंध के नदी भाग में बसे लोगों को स्थिति की जानकारी देने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिलास्तर पर गठित टीमों को लगातार गश्त करने का निर्देश दिया गया है।

गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इन स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर गंगा

गंगा नदी दीघा, गांधी घाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में, कोसी बलतारा और कुर्सैला में तथा बूढ़ी गंडक खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर है। पुनपुन नदी श्रीपालपुर और घाघरा दरौली में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

बाढ़ प्रभावितों के लिए सामुदायिक रसोई का सहारा

बाढ़ प्रभावित जिलों में जिला प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य तेज किया गया है। भागलपुर में गंगा के बढ़े जलस्तर से प्रभावित करीब पांच हजार लोगों के लिए छह सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इनके माध्यम से अब तक 70,600 से अधिक थाली भोजन परोसा जा चुका है।

भोजपुर के चार प्रखंडों की 2.84 लाख प्रभावित आबादी के लिए 13 सामुदायिक रसोई केंद्र सक्रिय हैं। पटना के नौ प्रखंडों की 2.32 लाख आबादी के लिए आठ सामुदायिक रसोई संचालित हैं। सात नए स्थानों पर भी रसोई केंद्र शुरू किए गए हैं।

सारण में करीब 20 हजार प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई संचालित है, जबकि वैशाली में 85 हजार प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाई जा रही है। वैशाली में विशेष राहत शिविर में 326 लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है।

693 सरकारी नावों से सुरक्षित निकासी

बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और सुरक्षित निकासी के लिए विभिन्न जिलों में 693 सरकारी नावों का परिचालन किया जा रहा है। वैशाली में सबसे अधिक 155 नावें चल रही हैं। इसके अलावा समस्तीपुर में 88, भोजपुर में 87, पटना में 70, मधेपुरा में 58, खगड़िया में 43 और पूर्णिया में 35 सरकारी नावों का परिचालन हो रहा है।

अरवल, बक्सर, बेगूसराय, समस्तीपुर, खगड़िया, मुंगेर और कटिहार समेत अन्य प्रभावित जिलों में भी प्रशासन की ओर से राहत सामग्री, भोजन और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की जा रही है।

प्रशासन को लगातार निगरानी के निर्देश

आपदा प्रबंधन विभाग के स्तर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक टीमों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर गंगा के HFL के करीब पहुंचने के कारण पटना समेत नदी के किनारे बसे दियारा क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

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