इस स्कूल में घंटी सिर्फ कक्षा शुरू होने का संकेत नहीं देती, बल्कि मुस्कुराहट, संवाद और आत्मविश्वास का दरवाजा भी खोलती है। यहां बच्चे किताबों के साथ अपने मन को भी पढ़ना सीखते हैं। कोई उदास हो तो उसके लिए मन की गांठ खोलो जैसे खेल खेले जाते हैं, कोई अकेला पड़े तो साथी उसका हाथ थाम लेते हैं। स्कूल की दीवारों पर सिर्फ चार्ट नहीं, भावनाएं लिखी हैं। पेड़ों की शाखाओं पर समस्याएं नहीं, उनके समाधान उगते हैं।
शिक्षा का प्रेरक मॉडल बन रहा यह स्कूल
भगवतपुर विकास खंड के कंपोजिट स्कूल असवारे खुर्द में पढ़ाई अब सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रही। यहां मानसिक स्वास्थ्य, संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मविश्वास को भी शिक्षा का हिस्सा बनाया गया है। “आनंदशाला” नाम से चल रही इस पहल में बच्चे स्वयं गतिविधियों का संचालन करते हैं और एक-दूसरे के मन को समझने की कोशिश करते हैं। शिक्षा के प्रेरक मॉडल बन रहे इस स्कूल की अलग-अलग गतिविधियों में बच्चे चाव से भाग लेते हैं।
स्कूल का वातावरण आनंद से परिपूर्ण
आसमान की कक्षा में, चांद बना है टीचर, तारों को वह पढ़ा रहा, हौले से मुसकाकर…। निश्चित ही ये पंक्तियां आभासी और काल्पनिक हैं। प्रकाश मनु की इन पंक्तियों के भाव बता रहे हैं कि स्कूल का वातावरण आनंद से परिपूर्ण है। बच्चे पढ़ने के लिए आतुर हैं। तभी वह फिर लिखते हैं- टिम्मक-टिम्मक तारे अपने, साथी लगे बुलाने, छोड़ो खेल-कूद शैतानी, टीचर लगे पढ़ाने…। यदि हम कहें कुछ ऐसा ही विद्यालय भगवतपुर विकासखंड का असवारे खुर्द तो अतिशयोक्ति न होगी। यहां छात्र छात्राओं को शैक्षिक ज्ञान के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते हुए सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग बनाया जा रहा है।
साइबर हाइजीन के लिए भी कक्षाएं विद्यार्थी चलाते हैं
भगवतपुर विकास खंड के इस कंपोजिट विद्यालय में करीब 550 छात्र छात्राएं और 13 शिक्षक हैं। वर्षभर अध्यापकों के साथ विद्यार्थियों की उपस्थिति 80 प्रतिशत से अधिक रहती है। परिसर में विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य वृक्ष, स्वास्थ्य दीवार, कृतज्ञता का वृक्ष, भावना वृत्त, ब्रीदिंग बाक्स आदि बना रखा है। ये सभी उपक्रम छात्र छात्राओं को सामाजिक दायित्व के साथ संवेदनाओं को जागृत करने में सहायक बन रहे हैं। इस पाठशाला में साइबर हाइजीन के लिए भी कक्षाएं विद्यार्थी स्वयं चलाते हैं। परिसर की इस व्यवस्था को आनंदशाला नाम दिया गया है।
बच्चों का नेतृत्व छात्रा चांदनी करती हैं
जूनियर वर्ग की छात्रा चांदनी बच्चों का नेतृत्व करती हैं। यहां जो मानसिक स्वास्थ्य वृक्ष बना है, उसकी जड़ों पर बच्चे विभिन्न प्रकार की समस्याओं के कारण अंकित करते हैं। शाखाओं पर समस्या के संकेत और पत्तियों पर समाधान लिखते हैं जो अन्य विद्यार्थियों के ज्ञान व सोचने के तरीके को विस्तार देता है। छात्रा शिवानी ने मानसिक स्वास्थ्य दीवार बना रखी है, इसमें गरीबी, प्रवासन, दुर्व्यवहार अथवा उपेक्षा से जन्मी मानसिक समस्या और समाधान लिखते हैं।
समाधान के लिए होती है समूह परिचर्चा
इनमें कम अंक लाने, स्वभाव में आक्रामकता, भोजन या कक्षा छोड़ने, पढ़ाई में रुचि न लेने जैसी परेशानियों को लिखा जाता है। समाधान के लिए समूह परिचर्चा भी होती है। छात्रा अंशिका ने लाल रंग से चेतावनी संकेत बना रखे हैं, जैसे किसी ने दूसरे बच्चों से दूरी बना ली, कोई पढ़ाई की बात करने पर रोने लगे तो विचारणीय है। उसके लिए दूसरे बच्चे कुछ न कुछ उपाय करते हैं जैसे कविता लिखना या फिर मन की गांठ खोलो जैसे खेल खेले जाते हैं।
ब्रीदिंग बाक्स से मानसिक शांति-एकाग्रता का अभ्यास
राष्ट्रीय मेंटर व विद्यालय में सहायक अध्यापक शत्रुंजय शर्मा कहते हैं कि स्कूल की प्रधानाध्यापक रीता भारतीया, मीना मंच की सुगमकर्ता मंजू श्रीवास्तव भी इन गतिविधियों में सहयोगी हैं। स्कूल में ब्रीदिंग बाक्स के नाम से एक गतिविधि होती है। यह स्वास्थ्य के बाक्स को खोलने का प्रयास है। बच्चे तनाव कम करने के लिए श्वास संबंधी अभ्यास प्रतिदिन करते हैं। चार सेकेंड तक नाक से धीरे धीरे श्वास लेते हैं, फिर चार सेकेंड तक श्वास रोकते हैं, फिर श्वास छोड़ते हैं। चार सेकेंड तक फेफड़ों को खाली रखकर दोबारा प्रक्रिया शुरू की जाती है। इससे मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है।
स्कूल में होता है डस्टबिन ऑडिट
छात्रा अंतिमा और उनके साथी साप्ताहिक रूप से डस्टबिन आडिट करते हैं। इसमें कूड़ा कम करने और कचरे का दोबारा प्रयोग या उसके संपूर्ण निस्तारण की प्रक्रिया को बताया जाता है। इसीक्रम में जल उपयोग लेखा तैयार किया जाता है। कहां पानी खराब हो रहा, कैसे पानी बचाया जा सकता जैसे बिंदु रजिस्टर पर लिखे जाते हैं। किस विद्यार्थी ने क्या कदम उठाकर पानी बचाया उसे भी दर्ज किया जाता है।
नंदिनी का समूह सामाजिक संपर्क बढ़ा रहा
छात्र गोविंद अपने साथियों के साथ खाद्य प्रणाली में स्थानीय तथा मौसमी फलों के बारे में जानकारी एकत्र कर बच्चों को बताते हैं। नंदिनी का समूह हमारा गांव हमारा सहारा के लक्ष्य पर केंद्रित होकर विद्यालय में सामाजिक संपर्क बढ़ा रहा है। उन्होंने कृतज्ञता का वृक्ष और आभार कोना बना रखा है। यहां जिन लोगों से जीवन में मदद मिलती है उसका उल्लेख किया जाता है।


