झारखंड की कानून-व्यवस्था ध्वस्त… सीता सोरेन ने हेमंत सरकार को घेरा; छात्रों पर दर्ज मुकदमों को लेकर लिखा खत
झारखंड में लगातार हो रहे आदिवासी लड़कियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटना और JPSC-JSSC Scam के विरोध में आंदोलन करने वाले छात्रों पर दर्ज मुकदमों को लेकर भाजपा नेत्री सीता सोरेन ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए शुक्रवार को इंटरनेट मीडिया पर दो पोस्ट किए।
सीता सोरेन ने एक्स पर लिखा है-खुद को ‘आदिवासी हितैषी’ बताने वाली सरकार के राज में बहन-बेटियां अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं,अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस प्रशासन से मांग है कि इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए दरिंदों को फांसी की सजा दिलाई जाए और पीड़िता को तत्काल उच्च स्तरीय इलाज व मुआवजा मिले।
सीता सोरेन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी हैं। वह जामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। फिलहाल भाजपा में हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन ने जेपीएससी-जेएसएससी घोटाले के विरोध में आंदोलन करने वाले छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग की है।
परीक्षा में सुधार की मांग उठाना लोकतांत्रिक अधिकार
सीता सोरेन ने छात्रों पर दर्ज मामले को वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भी लिखा है। सीता सोरेन ने पत्र को एक्स पर पोस्ट कर शुक्रवार को दी जानकारी। उन्होंने JPSC और JSSC-CGL परीक्षा में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले युवाओं पर दर्ज मुकदमों को अविलंब वापस लेने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग उठाना युवाओं का लोकतांत्रिक अधिकार है। ऐसे में आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों पर दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को संवेदनशील निर्णय लेना चाहिए।
छात्रों के प्रदर्शन का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं
सीता सोरेन ने पत्र में कहा कि झारखंड के हजारों युवा और अभ्यर्थी लंबे समय से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, युवाओं ने अपनी मांगों और शिकायतों को सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सहारा लिया था।
उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं, बल्कि रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना था।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान कई छात्रों और छात्र नेताओं पर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए हैं। आपराधिक मुकदमों के कारण सरकारी नौकरी के सत्यापन के दौरान उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सीता सोरेन ने कहा कि मध्यम और गरीब परिवारों से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए ऐसी स्थिति उनके भविष्य पर गंभीर असर डाल सकती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

