गांवों से शहरों में हो रहा पलायन गंभीर चुनौती है। इससे शहरों में अनियोजित निर्माण और झुग्गी बस्तियां बसती जा रही हैं।
सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च (सीपीआर) द्वारा आयोजित एकीकृत ग्रामीण व शहरी विकास विषय पर आयोजित वेबिनार में भी विशेषज्ञों ने इस समस्या पर चर्चा की।
उनका कहना था कि गांवों में रोजगार व मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण शहरों में पलायन हो रहा है। इसे रोकने के लिए गांवों में रोजगार के अवसर, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और मनोरंजन जैसी मूलभूत सुविधाएं और परिवहन, संचार व अन्य आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए योजना, शासन और प्रबंधन में जरूरी बदलाव किया जाना चाहिए।
गांवों से पलायन रोकने के लिए कृषि को लाभदायक बनाने पर काम करना होगा। उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन में सहयोगी प्रयासों के माध्यम से किसानों की आय में काफी वृद्धि हो सकती है।
यह रणनीति किसानों की कमाई को दोगुना से अधिक कर सकती है। देश के सबसे बड़े कार्यबल की क्रय शक्ति को बढ़ा सकती है। इससे सभी क्षेत्रों में विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
इंस्टीट्यूशनल सिस्टम्स प्लानिंग काउंसिल (आइएसपीसी) द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच असमानताओं को कम करने के लिए डिजाइन किए गए माडल की भी जानकारी दी गई।
इसे तेलंगाना के दो स्थानों पर लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य गांवों के पास रोजगार के अवसर पैदा करना और पलायन को रोकना है।
सीपीआर के कौशल किशोर, डॉ. ओंकार मित्तल के साथ ही प्रोफेसर शशि शेखर सिंह, आइएएस अधिकारी शशि शेखर सिंह, पूर्व आइएएस अधिकारी जी अशोक कुमार, डॉ. अलका राय, डा. श्रीनिवास, प्रोफेसर संतोष मेहरोत्रा आदि ने अपने विचार रखे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

