बीसीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि बीसीसीएल उत्पादन, डिस्पैच और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार बेहतर काम कर रही है। नई वाशरियों के शुरू होने और पुरानी इकाइयों के आधुनिकीकरण से आने वाले वर्षों में कोयले का बेहतर उपयोग होगा, जिससे कंपनी की आय और लाभ दोनों में वृद्धि होगी।
55वीं आम सभा के बाद उन्होंने कहा कि बीसीसीएल का लक्ष्य विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
सीएमडी ने कहा कि कंपनी ने पांच वर्ष का उत्पादन एवं विकास रोडमैप तैयार किया है। भविष्य में मूनीडीह, पाथरडीह और मधुबन वाशरियों के उपयोग में बढ़ोतरी की जाएगी तथा उनका चरणबद्ध तरीके से नवीनीकरण भी होगा। बीसीसीएल का कोयला उच्च गुणवत्ता का है और आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से इसका अधिकतम लाभ उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य भविष्य में पांचवीं सीम तक सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से कोयला उत्पादन बढ़ाना है। इसके लिए आधुनिक मशीनों और नई खनन तकनीकों को प्राथमिकता दी जा रही है। बीसीसीएल पुरानी कंपनी जरूर है, लेकिन यहां उपलब्ध कोयले की गुणवत्ता देश में अपनी अलग पहचान रखती है।
सीएमडी ने स्पष्ट कहा कि जिन आउटसोर्सिंग कंपनियों का कार्य प्रदर्शन अनुबंध के अनुरूप नहीं है, उनके कार्यों की समीक्षा की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर ऐसी एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत हुई तो उन्हें हटाने का भी निर्णय लिया जाएगा। फंक्शनल डायरेक्टर स्तर पर भी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
उन्होंने कहा कि बीसीसीएल और धनबाद का रिश्ता एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। “बीसीसीएल है तो धनबाद है और धनबाद है तो बीसीसीएल है।” कंपनी से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 15 लाख लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसलिए कंपनी को मजबूत बनाना पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।
मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि कंपनी की 10 लाभ वाली और 10 घाटे में चल रही खदानों का विस्तृत अध्ययन कराया जा रहा है। घाटे वाली परियोजनाओं को लाभ में लाने के लिए उत्पादन, मशीनरी, श्रम उपयोग और लागत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने श्रमिकों से भी उत्पादन बढ़ाने में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विभागीय खदानों की क्षमता का अभी लगभग 50 प्रतिशत ही उपयोग हो रहा है। यदि कार्य क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होगी तो नुकसान वाली खदानों को भी लाभ में लाया जा सकेगा। कंपनी श्रमिकों के कल्याण और बेहतर सुविधाओं के लिए भी लगातार योजनाएं लागू कर रही है।
सीएमडी ने बताया कि बीसीसीएल हर वर्ष करीब 1100 करोड़ रुपये का पूंजीगत (कैपिटल) बजट खर्च करेगी। यह राशि मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, नई वाशरियों, खनन परियोजनाओं और यांत्रिक आधुनिकीकरण पर खर्च की जाएगी। साथ ही लागत नियंत्रण, मशीनों के उन्नयन और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कंपनी के लाभ में वृद्धि होने पर भविष्य में कर्मचारियों और हितधारकों को मिलने वाले लाभांश में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
प्रेस वार्ता में निदेशक (तकनीकी/संचालन) संजय कुमार सिंह, निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) राजीव कुमार सिंह, निदेशक (वित्त) राजेश कुमार सहित बीसीसीएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

