West champaran : जवानी में शुरू हुआ मुकदमा, बुढ़ापे में मिला इंसाफ, 23 साल बाद चारों हुए दोषमुक्त
23 साल पहले दर्ज मारपीट व हत्या के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने गुरुवार को चार अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
केस दर्ज होने के समय आरोपितों की उम्र करीब 45 से 48 वर्ष थी। अब फैसला आने तक सभी की उम्र 65 वर्ष से अधिक हो चुकी है।
इस लंबे अंतराल में अभियुक्तों की पूरी जवानी न्यायालय की तारीखों और कचहरी के चक्कर काटते हुए बीत गई। बुढ़ापे में पहुंचने के बाद उन्हें मामले से राहत मिली।
बताया जाता है कि आठ अगस्त 2003 को रामनगर थाना क्षेत्र के खजुरिया गांव निवासी भगवान चौधरी ने पुलिस को आवेदन देकर मारपीट का आरोप लगाया था।
आवेदन में उन्होंने बताया था कि घटना की रात करीब नौ बजे वह अपने दरवाजे पर बैठे थे। इसी दौरान गांव के अलगू चौधरी, विपत चौधरी, रामशीष चौधरी, गोबरी चौधरी, सुरेश चौधरी और बुद्धिराम चौधरी लाठी-डंडे के साथ उनके दरवाजे पर पहुंचे। आरोप है कि सभी ने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई।
मामले में पेश किए गए गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाही के आधार पर अदालत ने अभियोजन के मामले को संदेहास्पद माना। इसके बाद चारों अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।फैसले के बाद गांव में यह चर्चा रही कि जिन लोगों ने मामले की शुरुआत में अपनी जवानी देखी थी, वे फैसला आने तक बुजुर्ग हो गए। ग्रामीणों के बीच यह बात चर्चा का विषय बनी रही कि जवानी में शुरू हुआ केस बुढ़ापे में जाकर खत्म हुआ।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

