‘गलत नीयत से लगाए थे झूठे आरोप’, शेयर ट्रांसफर केस में टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी जीत; 3 दशक पुराने मामले का अंत

8.6kViews
1788 Shares

टाटा समूह और नोएल टाटा को एक बड़ी राहत मिली है। दरअसल, टाटा ट्रस्ट्स को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से 2 सितंबर 2026 का एक आदेश मिला, जिसमें 1989 के शेयर ट्रांसफर से जुड़ी शिकायत को बंद कर दिया गया। बयान के अनुसार, “टाटा ट्रस्ट्स का यह दावा सही साबित हुआ है कि शेयरों के ट्रांसफर से जुड़े आरोप बेबुनियाद, बिना किसी सबूत के और गलत नीयत से लगाए गए थे।” यह केस 1989 में नवलजबाई रतन टाटा ट्रस्ट (NRTT) द्वारा नेवल एच टाटा को टाटा संस के 833 शेयर ट्रांसफर से जुड़ा था और इसके बंद होने के साथ ही 3 दशक पुराने विवाद का आखिरकार अंत हो गया।

यह राहत ऐसे समय में मिली है जब टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन पद से एन चंद्रशेखरन के अचानक हटने के फैसले के कारण लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में चैरिटी कमिश्नर का फैसला नोएल टाटा के लिए राहत की बात होगी जो ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पर अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं।

टाटा ट्रस्ट्स ने क्या कहा?

टाटा ट्रस्ट्स ने एक बयान में कहा, “शेयर ट्रांसफर से जुड़े आरोप बेबुनियाद, बिना किसी सबूत के और गलत नीयत से लगाए गए थे – इस बात की पुष्टि हो गई है।” ट्रस्ट्स ने कहा, “ये आरोप एक सोची-समझी, दुर्भावनापूर्ण और सुनियोजित मुहिम का हिस्सा थे, जिसका एकमात्र मकसद टाटा ट्रस्ट्स की साख को नुकसान पहुंचाना था। यह एक ऐसा संस्थान है जिसने 130 से ज़्यादा सालों से देश की सेवा की है और हमेशा जन-विश्वास, जवाबदेही और नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है।”बता दें कि महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को 10 जून 2026 को लिखे एक पत्र में, टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से दिवंगत उद्योगपति नवल टाटा को टाटा संस के शेयरों के ट्रांसफर की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। उन्होंने इस मामले में ट्रस्ट्स के कामकाज में हितों के टकराव की संभावना पर चिंता जताई थी, क्योंकि चेयरमैन नोएल टाटा, नवल टाटा के उत्तराधिकारी के तौर पर शेयर ट्रांसफर से सीधे तौर पर लाभ पाने वाले व्यक्ति हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *