गत 21 जून को उजागर हुए नीट यूजी पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले की जांच में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव किया है। गुरुवार को ईओयू की टीम पहले जेल में बंद सॉल्वरों को रिमांड पर लेने की तैयारी में थी, लेकिन अंतिम समय में जांच की दिशा बदलते हुए पहले डिजिटल साक्ष्य मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
इसके तहत टीम ने तीनों कांडों के अनुसंधान पदाधिकारियों के साथ मिलकर जब्त मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में लखीसराय मंडल कारा में बंद 12 मेडिकल छात्र (सॉल्वर), एक मूल परीक्षार्थी और 17 बायोमेट्रिक कर्मियों के मोबाइल फोन शामिल हैं। इन मोबाइलों की काल हिस्ट्री, चैट रिकॉर्ड, लोकेशन, आपसी संपर्क, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग एवं यूपीआई लेनदेन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है।
जांच के दौरान कुछ नए तकनीकी इनपुट और संदिग्ध संपर्क भी सामने आए हैं, जिन्हें फिलहाल गोपनीय रखा गया है, ताकि जांच प्रभावित न हो।
ईओयू सूत्रों के मुताबिक, मुख्यालय स्तर से निर्देश मिला है कि रिमांड पर लेने से पहले उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का पूरा विश्लेषण कर लिया जाए। इसके बाद आरोपितों से पूछताछ के दौरान उनके बयानों का सीडीआर, चैट और अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों से मिलान किया जाएगा। इससे पूछताछ अधिक प्रभावी होगी और विरोधाभासी बयानों की तुरंत पुष्टि की जा सकेगी।
जांच एजेंसी का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद होने वाली पूछताछ से पूरे फर्जीवाड़ा नेटवर्क, फरार मास्टरमाइंड, आर्थिक लेनदेन के स्रोत और परीक्षा में शामिल अन्य सहयोगियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है। यही वजह है कि ईओयू अब तकनीकी जांच को प्राथमिकता देते हुए पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
उधर, ईओयू की एक टीम फरार मास्टरमाइंड रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट तक पहुंचने की कोशिश में लगी है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम ने कई जगहों पर छापामारी भी की है, लेकिन वह भूमिगत है। ईओयू सूत्रों के अनुसार, अब सॉल्वरों को अगले सप्ताह में रिमांड पर लिया जा सकेगा। उससे पहले तकनीकी जांच पूरी कर ली जाएगी।


