क्या है कश्मीर के संगरमाल की कहानी? कभी नहीं मिले थे खरीदार, अब 421.75 करोड़ रुपये की बोली ने चौंकाया

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 पहाड़ों की चोटियों पर भोर की पहली किरण जब अंधेरे को चीरते हुए उतरती है, तो वह सिर्फ सूर्योदय नहीं होती। वह बदलाव का संकेत होती है- एक नई सुबह की दस्तक। श्रीनगर का संगरमाल भी अब कुछ ऐसी ही नई सुबह की ओर बढ़ता दिख रहा है।

जिस संगरमाल सिटी सेंटर के गलियारों में कभी अपेक्षित रौनक नहीं आ सकी, जिसकी दुकानें ग्राहकों की राह देखती रहीं और जिसे श्रीनगर के आधुनिक कारोबारी भविष्य की बड़ी परियोजना के रूप में देखा गया था, उसी संगरमाल की करीब 45 कनाल जमीन ने अब निवेशकों का भरोसा इस कदर जगाया है कि बोली 421.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।सरकार को इस संपत्ति से करीब 200 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी। मगर निवेशकों ने इस अनुमान को दो गुने से भी ज्यादा कर दिया। यह आंकड़ा इसलिए बड़ा नहीं है कि जमीन की कीमत 421.75 करोड़ रुपये लगी। इसकी असली अहमियत इस बात में है कि निवेशकों ने श्रीनगर के भविष्य की कीमत 421.75 करोड़ रुपये आंकी है।

जहां कभी सन्नाटा था, वहां अब निवेश की आहट 

संगरमाल की कहानी नई नहीं है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव वर्ष 2002 में पड़ी थी। श्रीनगर विकास प्राधिकरण (एसडीए) ने इसे करीब सात लाख वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित किया। आधुनिक डिजाइन में पारंपरिक कश्मीरी वास्तुकला की झलक देने वाला यह परिसर वर्ष 2010 में शुरू हुआ तो इसे श्रीनगर के बदलते शहरी स्वरूप की पहचान माना गया।

बाद में संगरमाल सिटी सेंटर को आधुनिक व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश हुई। यहां 62 दुकानें, क्राफ्ट बाजार की 38 इकाइयां, 11 कियोस्क, दो फूड कोर्ट, रेस्तरां और कार्यालयों के साथ पार्किंग, लिफ्ट, एस्केलेटर और लैंडस्केप क्षेत्र जैसी सुविधाएं भी थीं।

योजना और जमीन की हकीकत के बीच दूरी बनी रही

ग्राहकों की कमी, अपेक्षित व्यावसायिक गतिविधियों का न होना और कमजोर फुटफॉल ने संगरमाल की रफ्तार रोक दी। कई दुकानें बंद रहीं और धीरे-धीरे आधुनिक सुविधाओं से सजा यह परिसर वीरानी की तस्वीर बनने लगा। मल्टीप्लेक्स, सर्विस अपार्टमेंट और शॉपिंग हाई स्ट्रीट जैसी योजनाएं भी अपेक्षित रूप से आकार नहीं ले सकीं, लेकिन अब कहानी का रुख बदल रहा है।

421.75 करोड़ की बोली ने चौंकाया

संगरमाल की करीब 45 कनाल यानी 5.625 एकड़ जमीन के लिए 25 अगस्त को सुबह 11 बजे ऑनलाइन फॉरवर्ड ऑक्शन शुरू हुआ। यह प्रक्रिया 26 अगस्त की रात 1:48 बजे तक चली। बोली बढ़ती गई और आखिरकार 421.75 करोड़ रुपये पर जाकर थमी।

परमेश कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड सफल बोलीदाता बनी। इसमें पहलगाम ग्रीन होटल्स, जम्मू-कश्मीर की एक कंपनी और भूटानी इंफ्रा लिमिटेड का गठजोड़ शामिल है।

सरकार के लिए यह सौदा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे करीब 200 करोड़ रुपये की उम्मीद थी। अंतिम बोली इससे 221.75 करोड़ रुपये अधिक रही। यानी सरकारी अनुमान जहां एक सीमा तय कर रहा था, वहीं बाजार ने उस संपत्ति के लिए उससे कहीं अधिक मूल्य तय किया।

दिसंबर-जनवरी में नहीं मिला था खरीदारों का भरोसा

संगरमाल की नई कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि एक असफल प्रयास के बाद सामने आया है।

दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में संपत्ति के मौद्रीकरण के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके थे। इसके बाद दोबारा फॉरवर्ड ऑक्शन कराया गया। इस बार तस्वीर पूरी तरह अलग थी। निवेशकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ी और बोली 421.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

यही अंतर बताता है कि बाजार का मूड बदल रहा है। जो संपत्ति कुछ समय पहले निवेशकों को पर्याप्त आकर्षित नहीं कर पाई थी, उसी के लिए अब करोड़ों रुपये की प्रतिस्पर्धी बोली सामने आई है।

लोकेशन ने खोली विकास की नई खिड़की

संगरमाल की सबसे बड़ी ताकत उसकी लोकेशन है। एक ओर कश्मीर गोल्फ कोर्स, सामने पोलो व्यू का पैदल बाजार, पास में चूंट कुल, करीब एक किलोमीटर की दूरी पर डल झील और ज्यादा दूर नहीं लाल चौक। अर्थात पर्यटन, खरीदारी, मनोरंजन और शहर के प्रमुख कारोबारी क्षेत्रों का संगम।

यही कारण है कि अब संगरमाल को सिर्फ एक पुराने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में नहीं देखा जा रहा। इसके आसपास की आर्थिक गतिविधियां इसे एक बड़े व्यावसायिक केंद्र में बदलने की क्षमता रखती हैं।

नई लीज व्यवस्था के तहत मल्टीप्लेक्स समेत आधुनिक व्यावसायिक सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव है। अगर ये योजनाएं जमीन पर उतरती हैं तो संगरमाल के गलियारों में वह रौनक लौट सकती है, जिसका इंतजार वर्षों से था।

बटमालू ने भी दिया भरोसे का संकेत

श्रीनगर में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का दूसरा संकेत बटमालू से मिला है। बटमालू बस स्टैंड क्षेत्र की करीब 70 कनाल जमीन के लिए बोली लगभग 95 करोड़ रुपये से शुरू हुई और 305 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। कंस्ट्रक्शन इंजीनियर्स को सर्वोच्च बोलीदाता बताया गया है। यहां शॉपिंग, कार्यालय और आवासीय सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।

संगरमाल और बटमालू- दोनों संपत्तियों में बोली का अनुमान से कहीं ऊपर जाना प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है। लंबे समय से कम इस्तेमाल हो रही सरकारी जमीन अब केवल निष्क्रिय संपत्ति नहीं, बल्कि राजस्व और आर्थिक गतिविधियों का माध्यम बन सकती है।

कश्मीर के बदलते कारोबारी माहौल की पहली किरण?

एक-दो परियोजनाओं की सफलता के आधार पर पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने का दावा करना जल्दबाजी होगी। लेकिन संगरमाल की बोली को नजरअंदाज करना भी मुश्किल है।

421.75 करोड़ रुपये की बोली यह बताती है कि निवेशक श्रीनगर की लोकेशन, पर्यटन क्षमता और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को लेकर पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक नजरिया रख रहे हैं।

यह भरोसा तभी वास्तविक आर्थिक बदलाव में बदलेगा जब प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर जमीन पर उतरेंगी, रोजगार पैदा करेंगी और स्थायी कारोबारी गतिविधियां विकसित होंगी। फिर भी संगरमाल ने एक महत्वपूर्ण संकेत दे दिया है।

कभी जिस जगह पर ग्राहकों के कदमों का इंतजार था, आज वहां निवेशकों की बोली की गूंज सुनाई दे रही है। श्रीनगर की इस जमीन ने सिर्फ अपनी कीमत नहीं बढ़ाई है। उसने उस भरोसे को भी आवाज दी है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी पूंजी होता है।

भोर की पहली रोशनी को कश्मीरी संदर्भ में संगरमाल कहा जाए तो आज श्रीनगर का संगरमाल अपने नाम को जैसे नया अर्थ दे रहा।

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