125 यूनिट फ्री बिजली के बाद सम्राट चौधरी का अगला बड़ा प्लान! बिहार में घटेगा बिजली का बोझ, किसानों को भी फायदा

1659 Shares

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गांधी मैदान से राज्य की बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार का बड़ा विजन सामने रखा। अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन में उन्होंने मुफ्त बिजली, किसानों के लिए सस्ती बिजली और रूफटॉप सोलर को लेकर कई अहम बातें कहीं।

सरकार का जोर अब सिर्फ बिजली सब्सिडी देने पर नहीं, बल्कि कम लागत में बिजली उत्पादन बढ़ाने पर भी है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक बिहार में उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। इस योजना पर सरकार को हर साल करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

इतनी बड़ी राशि को देखते हुए सरकार अब बिजली उत्पादन की लागत घटाने और राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

अब सरकार ने बनाया बिजली बचाने का नया प्लान

सम्राट चौधरी ने कहा कि बिजली सब्सिडी से आम लोगों को राहत मिल रही है, लेकिन लंबे

इसी रणनीति के तहत सरकार ऊर्जा के नए विकल्पों पर जोर दे रही है। इसमें रूफटॉप सोलर को खास महत्व दिया जा रहा है।

सरकार की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाए जाएं। इससे घरेलू बिजली की जरूरत का कुछ हिस्सा स्थानीय स्तर पर पूरा हो सकेगा।

साथ ही बिजली की कुल मांग और सरकारी व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करने की उम्मीद है।

किसानों के लिए 55 पैसे यूनिट का दावा

मुख्यमंत्री ने किसानों को मिलने वाली बिजली की दर को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों से महज 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल लिया जा रहा है।

सरकार का दावा है कि इससे खेती-किसानी के लिए बिजली की लागत कम रखने में मदद मिल रही है।

सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य के 60 लाख से अधिक किसान डिजिटल माध्यम से सरकार से जुड़े हैं।

सरकार का लक्ष्य डिजिटल कनेक्टिविटी के जरिए किसानों तक योजनाओं और सरकारी सेवाओं की पहुंच को और मजबूत करना है।

बिजली के साथ डिजिटल सुविधाओं का विस्तार भी सरकार के विजन का हिस्सा बताया गया।

यूपी से ज्यादा सब्सिडी का दावा

बिजली सब्सिडी को लेकर मुख्यमंत्री ने बिहार की तुलना उत्तर प्रदेश से भी की। उन्होंने दावा किया कि बिहार देश में सबसे ज्यादा बिजली सब्सिडी देने वाले राज्यों में है और उत्तर प्रदेश की तुलना में भी यहां अधिक सब्सिडी दी जा रही है।

इस दावे के साथ सरकार ने एक तरफ आम उपभोक्ताओं को राहत देने की नीति दिखाई है तो दूसरी तरफ बिजली उत्पादन की लागत घटाने पर जोर दिया है।

अब सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि मुफ्त बिजली और भारी सब्सिडी के साथ ऊर्जा क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत कैसे बनाया जाए।

गांधी मैदान में बिजली के साथ सुरक्षा का भी पूरा प्लान

स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर गांधी मैदान में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मैदान को चार सेक्टर और सब-सेक्टर में बांटा गया था।

गांधी मैदान और कारगिल स्मृति चौक के आसपास 62 स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई।

बारिश को देखते हुए दर्शक दीर्घा के ऊपर करीब 80 हजार वर्गफीट क्षेत्र में शेड भी बनाया गया था। अलग-अलग वर्गों के लिए प्रवेश द्वार निर्धारित किए गए थे।

इस तरह मुख्यमंत्री के संबोधन में जहां बिजली को लेकर बड़ा रोडमैप सामने आया, वहीं समारोह में सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन के फोकस में रही।

अब बिहार की बिजली नीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 125 यूनिट मुफ्त बिजली, किसानों को सस्ती बिजली और रूफटॉप सोलर के इस मॉडल से सरकार ऊर्जा का खर्च कितना कम कर पाती है।

अगर उत्पादन लागत घटाने और सौर ऊर्जा का विस्तार करने की योजना जमीन पर तेजी से उतरती है तो इसका असर आने वाले समय में राज्य की बिजली व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *