रोहतक के कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने देश के कार्यबल में विभिन्न क्षेत्रों की हिस्सेदारी के आंकड़े रखे। जवाब के मुताबिक विनिर्माण क्षेत्र की कुल कार्यबल में हिस्सेदारी वर्ष 2017-18 में 12.1 प्रतिशत थी, जो 2025 में भी 12.1 प्रतिशत ही रही। इसी अवधि में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 31.1 से बढ़कर 31.8 प्रतिशत हुई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 2020-21 में घटकर 10.9 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें सुधार हुआ, लेकिन 2025 तक यह 2017-18 के स्तर से आगे नहीं बढ़ सकी।
सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि उन्होंने सरकार से पूछा था कि क्या देश में रोजगार सृजन का स्तर पर्याप्त है और यदि नहीं, तो इसके कारण क्या हैं।
उनके अनुसार सरकार ने इस सवाल का सीधा जवाब देने की बजाय रोजगार से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, लेकिन इन योजनाओं से वास्तविक रूप से कितने रोजगार पैदा हुए, इसका स्पष्ट आंकड़ा नहीं बताया गया।
दीपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार के विकास माडल में रोजगार सृजन अपेक्षित गति से नहीं हुआ। हुड्डा ने कहा कि ‘मेक
इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी वर्षों से लगभग स्थिर है।
सांसद ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के दावों के बावजूद रोजगार के अवसर उसी अनुपात में क्यों नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों में खाली पदों को भरने तथा युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

