ताश का खेल बीच में न छोड़ना पड़े इसलिए बना था ‘Sandwich’, तुर्किए और चीन से भी है खास कनेक्शन

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 ऑफिस या स्कूल के लिए लेट हो रहे हों तो किचन में फटाफट बनाने के लिए सबसे पहले सैंडविच ही याद आता है। कभी सोचा है कि इस झटपट बनने वाले सैंडविच को पहली बार किसने बनाया था और इसे बनाने के पीछे की कहानी क्या थी? अगर नहीं तो चलिए आज आपको सैंडविच की इसी दिलचस्प कहानी के बारे में बताते हैं।

सैंडविच से जुड़ी हैं कई कहानियां

सैंडविच के बनने का इतिहास खंगाले तो हम पाते हैं कि इससे जुड़ी कोई एक नहीं, बल्कि कई कहानियां हैं:

इंग्लैंड के व्यस्त आदमी से जुड़ी कहानी

सैंडविच की सबसे फेमस कहानी इंग्लैंड के जॉन मोंटेगू जिन्हें ‘सैंडविच के चौथे अर्ल’ कहा जाता है, से जुड़ी हुई है। जॉन मोंटेगू 18 वीं सदी के कुलीन वर्ग से आने वाले नामी ब्रिटिश राजनेता थे, कहते हैं कि उन्हीं के नाम पर सैंडविच का नाम रखा गया है। इससे जुड़ी एक कहानी ऐसी है कि जॉन मोंटेगू बेहद व्यस्त व्यक्ति थे, उन्हें ताश खेलने की बुरी आदत थी।

एक बार जब वो बाजी खेलने के बैठे तो 24 घंटे उसी खेल में लगे रहे। उस समय ब्रिटिश राजनेता को खाने-पीने तक की फुर्सत नहीं थी। इसी बीच में उन्होंने के ब्रेड के बीच में मांस का टुकड़ा दबाया और खाने लगे। दूसरे साफ सुथरे हाथ से वो ताश खेलते रहे और तभी से सैंडविच लोगों के बीच पॉपुलर हो गया। कहा तो यह भी जाता है कि यह कहानी केवल एक किंवदंती है, इसमें सच्चाई नहीं।

चीन से भी है नाता

सैंडविच का जब नाम भी नहीं था, तब भी यह खाया जाता था। इसके प्रमाण साल 200 ईसा पूर्व के आसपास चीन से जुड़े बताए जाते हैं। इसे चीन में आज ‘रू जिया मो’ यानी चाइनीज हैमबर्गर कहा जाता है पर उस दौर में रोटी के बीच मांस का टुकड़ा दबाकर खाया जाता था।

फ्लैटब्रेड मिडल ईस्ट के खानपान का हिस्सा रही

‘बाउंटीफुल एम्पायर: ए हिस्ट्री ऑफ ऑटोमन कुजीन’ नाम की एक किताब दावा करती है कि ब्रेड में फिलिंग कर उसे खाने की परंपरा तुर्किए की संस्कृति का हिस्सा रहा है। इस बारे में कुछ इतिहासकारों का कहना है इंग्लैंड से पहले ही यहां सैंडविच खाया जाता था। जॉन मोंटेगू तुर्की और ऑटोमन साम्राज्य की यात्रा की थी और यहीं से तुर्किए की सैंडविच खाने की संस्कृति इंग्लैंड तक पहुंची।

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