बिहार में छात्रों के साथ खड़े तेजस्वी, झारखंड में JPSC-JSSC आंदोलन पर खामोशी क्यों? उठने लगे सियासी सवाल

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बिहार की राजनीति में छात्र आंदोलन और तेजस्वी यादव का नाम एक-दूसरे से जुड़ा रहा है। NEET जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरा और छात्रों की आवाज उठाने का दावा किया। लेकिन अब झारखंड का छात्र आंदोलन एक अलग राजनीतिक सवाल खड़ा कर रहा है।

रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर आंदोलनरत हैं। 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने और जांच की मांग को लेकर छात्र लगातार आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में सवाल है… तेजस्वी यादव की नजर झारखंड के इन छात्रों पर क्यों नहीं पड़ रही?

बिहार में मुखर तेवर, झारखंड में सन्नाटा

तेजस्वी यादव ने बिहार में छात्र और युवा मुद्दों को कई बार राजनीतिक मुद्दा बनाया है। NEET पेपर लीक के मामले में उन्होंने सरकार पर सवाल खड़े किए थे।

छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की थी। ज्ञापन सौंपने से लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने तक उनका रुख चर्चा में रहा।

अब यही तुलना झारखंड में उनके राजनीतिक रुख को लेकर की जा रही है। क्योंकि यहां भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

रांची में आंदोलन, मांगों पर टिकी निगाहें

रांची में JPSC और JSSC से जुड़े अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की जांच शामिल है।

14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा बताई जा रही है। कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल का रास्ता भी अपनाया है।

छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच जरूरी है। यही वजह है कि अब आंदोलन सिर्फ परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक सवाल भी बनता जा रहा है।

झारखंड में RJD सत्ता का हिस्सा, यहीं से बढ़ा सवाल

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा राजद की भूमिका को लेकर हो रही है। झारखंड में राजद, हेमंत सोरेन सरकार के साथ सत्ता में साझेदार है।

राजद नेता और मंत्री संजय प्रसाद यादव आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए बनी समिति में शामिल बताए जा रहे हैं। यानी पार्टी के स्तर पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की भूमिका मौजूद है।

लेकिन इसी बीच तेजस्वी यादव की ओर से कोई बड़ा सार्वजनिक हस्तक्षेप नजर नहीं आने की बात कही जा रही है। यही अंतर अब बिहार और झारखंड की राजनीति की तुलना को जन्म दे रहा है।

क्या सत्ता की साझेदारी ने बदला राजद का रुख?

राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सत्ता में साझेदारी का असर पड़ रहा है? बिहार में विपक्ष की भूमिका निभाते हुए तेजस्वी सरकार पर सीधे हमले करते रहे हैं।

वहीं झारखंड में राजद खुद सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में सरकार के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन पर पार्टी की रणनीति स्वाभाविक रूप से चर्चा में है।

हालांकि तेजस्वी यादव की चुप्पी को लेकर कोई आधिकारिक कारण सामने आए बिना निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।फिलहाल यह सवाल राजनीतिक बहस में जरूर जगह बना चुका है।

छात्रों की मांग से ज्यादा अब बन गया है सियासी मुद्दा

JPSC-JSSC आंदोलन की दिशा अब केवल परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं दिख रही। इसने विपक्षी राजनीति, गठबंधन धर्म और नेताओं की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्र जानना चाहते हैं कि उनकी मांगों पर सरकार और राजनीतिक दल कितना गंभीर रुख अपनाते हैं। वहीं विपक्षी दलों के लिए यह सवाल भी अहम है कि वे सत्ता में रहने और विपक्ष में रहने के दौरान कितने एक जैसे तेवर रखते हैं।

तेजस्वी यादव की चुप्पी पर उठ रहे सवालों का जवाब फिलहाल उनके अगले बयान या राजनीतिक कदम से ही मिल सकता है।
तब तक झारखंड के छात्र आंदोलन के बीच एक सवाल लगातार गूंजता रहेगा… बिहार वाला तेजस्वी झारखंड में कब बोलेगा?

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