उर्स-ए-रजवी में बोले मुफ्ती सलीम बरेलवी- ‘अगर ईरान मजहब के लिए लड़ता तो गाजा और अक्सा के लिए लड़ता, अमेरिका-ईरान जंग सिर्फ सियासी’
उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन आज बाद नमाज-ए-फजर कुरान ख्वानी हुई। इसके बाद मुख्य कार्यक्रम इस्लामिया मैदान में दरगाह सरपरस्त हजरत मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की सदारत व सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में शुरू हुआ। हाजी गुलाम सुब्हानी और आसिम नूरी ने मिलाद नजराना पेश किया। कुरान की तिलावत से मुफ्ती जईम रजा ने सुबह 8 बजे महफिल का आगाज किया।
मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि कुल शरीफ के बाद तहफुज मजहब-ओ-मसलक कान्फ्रेंस को खिताब करते हुए मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि हाल ही में अमेरिका और ईरान की बीच लड़ी गई जंग एक सियासी जंग थी, इसे हरगिज मजहबी जंग नहीं कहा जा सकता। अगर ईरान मजहब इस्लाम के लिए जंग लड़ता तो पहले मस्जिद-ए-अक्सा, फिलिस्तीन, गाजा और अफगानिस्तान के लिए लड़ता।
आगे मुसलमानों को ताकीद करते हुए कहा कि हमें अपने मुल्क और अपने आप को मजबूत करना है तो हमें उच्च शिक्षा हासिल करनी होगी। मुस्लमानों को अपने एरियो में अच्छे स्कूलों की स्थापना करनी होगी। आज के नौजवान को नशे से दूर रहकर अपना और अपने परिवार का बेहतर मुस्तबकिल बनाना है।
बच्चे ही हमारे मुल्क का भविष्य है। आज हमारे मदरसों को आतंकवाद का अड्डा कहकर बदनाम किया जा रहा है बल्कि हकीकत यह है कि मदरसों से हमेशा देश प्रेम का पाठ पढ़ाया गया है। मदरसों ने देश भक्त पैदा किए है। देश के राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, एपीजे अब्दुल कलाम आदि ने भी मदरसों से ही शिक्षा हासिल की।
आखिर में देश के मुसलामानों को नसीहत करते हुए कहा कि वो ऐसे धरने प्रदर्शन से दूर रहे जिसका कोई कायद न हो। आज कितने हमारे नौजवान बेगुनाह जेलों में सालों से बंद है। कही कोई मसला पेश आए तो हम कोर्ट कचहरी और पुलिस प्रशासन का सहारा लें।
उर्स का संचालन करते हुए कारी यूसुफ रजा ने अपने खिताब में मुस्लिम बेटियां और उनके बहकते कदम पर फिक्र जाहिर करते हुए कहा कि मुसलमान अपनी बेटियों को अच्छी तालीम (शिक्षा) और तरबियत (संस्कार) शरई दायरे में रहकर दें। उनके हाथों में मोबाइल की जगह कानून-ए-शरीयत, बहारे शरीयत जैसी किताबें दे ताकि वो समझ सके भलाई किसमें है।
कारी अब्दुर्रहमान कादरी ने कहा कि मसलक-ए-आला हजरत का मिशन बहावी, देवबंदी का रद्द और सुन्नियों में आपसी इत्तेहाद है। इसी मिशन को हुज्जातुल इस्लाम, मुफ्ती-ए-आजम हिन्द, मुफस्सिर-ए-आजम, रेहान-ए-मिल्लत समेत खानदान के बुजुर्गों ने आगे बढ़ाया।
रेहान-ए-मिल्लत ने मजहब-ओ-मसलक के फरोग के लिए यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका समेत एशिया के मुल्कों का दौरा कर परचम-ए-रजा को बुलंद किया। मौलाना साबिर उल कादरी (बिहार) ने कहा कि रेहान- ए-मिल्लत जहां एक तरफ बेहतरीन शायर थे वहीं दूसरी तरफ आपने बहुत से फतवे भी लिखे।
आप तलबा (छात्रों) को अरबी और इंग्लिश में भी दर्स देते थे। इसके अलावा मौलाना अव्वल रजा महकश (बिहार), मुफ्ती नवाजिश आलम, मौलाना जैनुल आबेदीन, मुफ्ती अकील उर रहमान आदि ने भी खिताब किया। सुबह 09 बजकर 58 मिनट पर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
फातिहा कारी सखावत मुरादाबादी, मुफ्ती जमील नूरी, मुफ्ती अख्तर हुसैन ने पढ़ी। खुसूसी दुआ मुफ्ती आकिल रजवी ने मुल्क ओ मिल्लत की खुशहाली के लिए की। दोपहर 01 बजकर 30 मिनट पर इस्लामिया मैदान में मुफ्ती अय्यूब नूरी ने नमाज ए जुमा अदा कराया। हजारों लोगों ने नमाज अदा की।
नासिर कुरैशी ने बताया कि आज सियासी और गैर सियासी चादरें भी दरगाह पर पेश होती रहे। आंवला, फरीदपुर, मीरगंज, भोजीपुरा, बहेड़ी, तिलियापुर, देवचरा के अलावा पुराना शहर, जसोली, जखीरा, बाकर गंज, किला आदि से चादरों के जुलूस दरगाह पहुंचते रहे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

