सिंगापुर अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के लिए विश्व स्तर पर पहचाने जाने वाले देश में नया जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिला है। सिंगापुर जनरल हाउसहोल्ड सर्वे के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में देश के धार्मिक स्वरूप में अहम परिवर्तन हुए हैं।
इस सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि जहां एक तरफ कई प्रमुख धर्मों को मानने वालों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, वहीं हिंदू आबादी और किसी भी धर्म को न मानने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है।
पिछले 5 साल में सिंगापुर के धार्मिक आबादी में परिवर्तन
| धर्म | 2020 | 2025 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| ईसाई | 18.9% | 17.1% | -1.8% |
| ताओ | 8.8% | 7.3% | -1.5% |
| इस्लाम | 15.6% | 15.0% | -0.6% |
| बौद्ध | 31.1% | 30.9% | -0.2% |
| हिंदू | 5.0% | 5.4% | +0.4% |
| कोई धर्म नहीं | 20.0% | 23.9% | +3.9% |
हिंदुओं की आबादी में इजाफा
सरकारी सर्वे के मुताबिक, 15 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी में हिंदू ही एकमात्र ऐसा प्रमुख धर्म है, जिसके अनुयायियों का प्रतिशत पिछले पांच वर्षों में बढ़ा है। वर्ष 2020 में सिंगापुर में हिंदुओं की कुल हिस्सेदारी 5.0 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गई है, यानी इसमें 0.4 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके उलट, ईसाई, ताओ, इस्लाम और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों के अनुपात में लगातार गिरावट आई है। आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे अधिक 1.8 प्रतिशत की कमी ईसाई आबादी में आई है, जबकि ताओ धर्म के अनुयायियों में 1.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।
धर्म से दूरी बनाने वालों की संख्या में सबसे तेज उछाल
इस जनसांख्यिकीय बदलाव का सबसे दिलचस्प और बड़ा पहलू यह है कि किसी भी धर्म में आस्था न रखने वालों नास्तिकों की आबादी सबसे तेजी से बढ़ी है। पिछले पांच सालों में ऐसे लोगों की हिस्सेदारी 20.0 प्रतिशत से बढ़कर 23.9 प्रतिशत हो गई है, जो कि 3.9 प्रतिशत की एक बड़ी छलांग है।
सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर जैक चिया के अनुसार, इस नए ट्रेंड का सीधा सा अर्थ यह है कि अब सिंगापुर में लगभग हर चौथा नागरिक ऐसा है, जो खुद को किसी विशेष धार्मिक पहचान से जोड़कर नहीं देखता है।
धर्म में बने रहने की दर
| धर्म | दर (%) |
|---|---|
| हिंदू | 97.0% |
| मुस्लिम | 96.1% |
| ताओ | 91.7% |
| बौद्ध | 79.7% |
| कैथोलिक | 65.9% |
| अन्य ईसाई | 41.9% |
हिंदू आबादी के बढ़ने के मुख्य कारण
रिपोर्ट में सिंगापुर में हिंदू आबादी के बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से प्रवासन और जनसांख्यिकीय संतुलन को कारण बताया गया है। पहला बड़ा कारण भारत से आने वाले हिंदू प्रोफेशनल्स की बढ़ती संख्या और उनके द्वारा वहां स्थायी नागरिकता प्राप्त करना है।
इसके अतिरिक्त, जन्म और मृत्यु दर का अंतर भी एक महत्वपूर्ण कारक है। हिंदुओं के बीच जन्म दर 7.3 प्रति हजार और मृत्यु दर 5 प्रति हजार है। यह आंकड़े स्थानीय चीनी समुदाय की तुलना में हिंदुओं की अधिक जन्म दर और कम मृत्यु दर को दर्शाते हैं।
मूल धर्म में बने रहने का मजबूत रुझान
हिंदू आबादी की वृद्धि का एक और सबसे पुख्ता कारण उनकी अपने धर्म के प्रति दृढ़ता और उसे न छोड़ने की प्रवृत्ति है। सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि अपने धर्म में जीवन भर बने रहने (रिटेंशन रेट) के मामले में हिंदू समुदाय सबसे आगे है। करीब 97.0 प्रतिशत हिंदू अपने मूल धर्म का ही पालन करते हैं।
इस मामले में मुस्लिम समुदाय दूसरे स्थान पर है, जिनकी दर 96.1 प्रतिशत है। इसके बाद ताओ 91.7 प्रतिशत और बौद्ध 79.7 प्रतिशत का स्थान आता है। वहीं, ईसाई धर्म में यह दर काफी कम पाई गई है, जहां कैथोलिक समुदाय में यह 65.9 प्रतिशत और अन्य ईसाई वर्गों में मात्र 41.9 प्रतिशत दर्ज की गई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

