‘बुनकर केवल वस्त्र नहीं, भारत की सांस्कृतिक विरासत को बुनते हैं’; जमशेदपुर में बोले राज्यपाल संतोष गंगवार
झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शुक्रवार को बिष्टुपुर स्थित माइकल जान ऑडिटोरियम में वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च आर्गनाइजेशन की ओर से आयोजित 13वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया।
कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से आए बुनकरों, हस्तकरघा समितियों के प्रतिनिधियों एवं शिल्पकारों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि बुनकर केवल वस्त्र नहीं बुनते, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और पहचान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने सभी बुनकरों को हस्तकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान की सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि महात्मा गांधी ने चरखा और खादी को आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बनाया था। आज भी बुनकर हमारी संस्कृति और स्वदेशी परंपरा के सबसे बड़े संवाहक हैं।
झारखंड के जनजातीय और आदिवासी समाज ने अपनी हस्तकरघा परंपरा और विरासत को सहेजकर रखा है, जिसे राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाना हमारी जिम्मेदारी है।
सभा को मनोज कुमार सिंह, अनिल ठाकुर, विजय कुमार भारती सहित अन्य वक्ताओं ने हस्तकरघा उद्योग की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर विस्तार से विचार रखे।
झारखंड का रेशम का पूरे देश में अलग पहचान
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड का रेशम और यहां के बुनकरों की कलात्मकता पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने हस्तकरघा उद्योग को आधुनिक तकनीक, बेहतर उपकरण और राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए आश्वासन दिया कि बुनकरों की समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
समारोह के दौरान हस्तकरघा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बुनकरों को राज्यपाल ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में अनिल ठाकुर, विजय कुमार भारती, मनोज कुमार सिंह, आशुतोष राय, आनंद साहू, दिलीप कुमार पटेल तथा राज्य के विभिन्न जिलों से आए बुनकर एवं हस्तकरघा समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

