सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) के साथ मिलकर, 88 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई की है।
88 करोड़ रुपये के फ्रॉड मामले में मोस्ट वॉन्टेड भगोड़ी विशाखा राठौड़ को यूनाइटेड अरब एमिरेट्स (UAE) से भारत वापस लाया गया है।
CBI को मिली बड़ी सफलता
भारतीय अधिकारियों के अनुरोध पर इंटरपोल के जरिए विशाखा राठौड़ और उसके पति अविनाश राठौड़ के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस पर कार्रवाई करते हुए, UAE के अधिकारियों ने अविनाश को हिरासत में ले लिया।
अधिकारियों ने बताया कि राठौड़ को 23 जुलाई, 2026 को भारत लाया गया। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचने पर, पुणे पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे पुणे ले जाया गया और कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उसे 10 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया।
88 करोड़ का धोखाधड़ी का मामला
सीबीआई भारत में इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के तौर पर काम करते हुए, देश भर की कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाती है और इंटरपोल चैनलों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सहायता की सुविधा देती है।
जांच के मुताबिक, विशाखा और उसके पति ने लोगों को कई स्कीमों में निवेश करने के लिए उकसाया और उन्हें हर महीने निश्चित रिटर्न का झूठा वादा किया।
अविनाश राठौड़ और विशाखा पर निवेशकों के पैसे को बेईमानी से हड़पने और कई बैंक व डीमैट अकाउंट्स के जरिए उस पैसे को इधर-उधर करने का आरोप है।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि भारत ने 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को सफलतापूर्वक वापस लाया गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

