सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं; बंद ही रहेगा करतारपुर साहिब कॉरिडोर, सरकार ने संसद में दी जानकारी
सिख धार्मिक संगठनों और संस्थाओं की ओर से श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को जल्द से जल्द दोबारा खोलने की मांग की जा रही है, लेकिन मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए इसे फिलहाल निलंबित ही रखा जाएगा।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद में यह जानकारी दी। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह बात कही।
विदेश मंत्रालय से सवाल किया गया था कि क्या सिख समुदाय के नेताओं, सांसदों और प्रबुद्ध नागरिकों की तरफ से करतारपुर कॉरिडोर के धार्मिक और भावनात्मक महत्व को देखते हुए इसे जल्द खोलने का आग्रह प्राप्त हुआ है।
इसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान सरकार के बीच 24 अक्टूबर 2019 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करना और गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर पाकिस्तान स्थित पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर की यात्रा को आसान और सुगम बनाना था।
पहलगाम हमले के बाद लगी थी रोक
उन्होंने आगे बताया कि अक्टूबर 2024 में इस समझौते की अवधि को अगले पांच वर्षों के लिए और बढ़ा दिया गया था। हालांकि, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा कारणों से 7 मई 2025 से श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर का संचालन रोक दिया गया था।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि सरकार को सिख संस्थाओं और धार्मिक समूहों से कॉरिडोर को फिर से शुरू करने के संबंध में कई आवेदन मिले हैं, लेकिन वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए श्री कॉरिडोर का संचालन अभी बंद रखना ही अनिवार्य है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

