‘राम जन्मभूमि ट्रस्ट के गठन के रिकॉर्ड्स गोपनीय रखना सही’, केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय के फैसले को सही ठहराया

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ बनाने के लिए सरकार से स्वीकृत योजना और उससे जुड़े आदेश को एक गोपनीय फाइल में रखा था।

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने 2024 के एक आदेश में आरटीआइ एक्ट के तहत इन रिकार्ड्स को नहीं देने के फैसले को सही ठहराया था।

CIC ने गृह मंत्रालय को फैसले को ठहराया सही

आयोग ने मंत्रालय की इस दलील को स्वीकार कर लिया था कि इन रिकार्ड्स के उजागर होने से संबंधित लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

यह मामला नीरज शर्मा की ओर से दायर आरटीआइ अर्जी से जुड़ा है। उन्होंने ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ से जुड़े नोटिफिकेशन नंबर सीजी-डीएल-ई-05022020-215935 में बताए गए, केंद्र सरकार द्वारा पांच फरवरी, 2020 के आदेश नंबर 71011/02/2019-एवाई के जरिये स्वीकृत की गई ‘योजना की प्रमाणित प्रति’ और उससे जुड़े सरकारी आदेश मांगे थे।

गृह मंत्रालय से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर शर्मा ने आयोग में अपील की थी। 18 जून, 2024 को हुई सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने कहा कि योजना और उससे जुड़े सभी मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ के गठन से जुड़े सभी दस्तावेज आदि के पूरे संग्रह को एक गोपनीय फाइल में रखा गया है।

मंत्रालय के जवाब को स्वीकार करते हुए तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया का कहना था कि जनसूचना अधिकारी (पीआइओ) ने उचित जवाब दे दिया है एवं इस मामले में आयोग के और हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। इसके बाद 18 जून, 2024 को ही अपील का निपटारा कर दिया गया था।

पिछले वर्ष चार जून को जारी एक अलग आदेश में सीआइसी ने जांच की थी कि क्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आरटीआइ एक्ट की धारा 2(एच) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण (पब्लिक अथॉरिटी) है या नहीं।

गृह मंत्रालय का कहना था कि यह एक स्वतंत्र ट्रस्ट है, जिसका मालिकाना हक, नियंत्रण या वित्तपोषण सरकार के पास नहीं है। न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने इसे कोई फंड दिया है एवं सरकार की भूमिका केवल ट्रस्ट के गठन तक सीमित थी, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में किया गया था।

आयोग ने अपने फैसले में माना था कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिसे न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार से कोई आर्थिक मदद मिलती है, न उनका प्रशासनिक नियंत्रण है और इसलिए यह आरटीआइ एक्ट के दायरे में नहीं आएगा।

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