वीरपुर के मुजफ्फरा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की वार्डन रिंकू देवी की मौत के करीब पांच साल बाद मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।
विशेष जांच दल (एसआईटी) की दोबारा जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि रिंकू देवी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनकी गला घोंटकर हत्या की गई थी। हत्या के बाद इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटका दिया गया था।
इस मामले में पुलिस ने असुरारी निवासी कौशल कुमार और विद्यालय के आदेशपाल अजीत कुमार बबलू को गिरफ्तार किया है।
बुधवार शाम बेगूसराय एसपी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में गया प्रक्षेत्र के आईजी एवं विशेष जांच दल के मुख्य अनुसंधानक विकास वैभव ने पूरे मामले का खुलासा किया।
पहले आत्महत्या मानकर बंद कर दी गई थी जांच
आईजी विकास वैभव ने बताया कि चार अप्रैल 2021 को रिंकू देवी का शव विद्यालय परिसर में फंदे से लटका मिला था। शुरुआती पुलिस जांच में इसे आत्महत्या मान लिया गया।
उसी आधार पर मामले का निष्पादन कर दिया गया। हालांकि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की गई थी।
मृतका की पुत्री तेजस्विनी ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में गंभीर विसंगतियां पाते हुए मामले की नए सिरे से जांच का आदेश दिया और इसकी जिम्मेदारी गया प्रक्षेत्र के आईजी को सौंपी।
एफएसएल रिपोर्ट ने खोला हत्या का राज
आईजी ने बताया कि 13 जुलाई को विशेष जांच दल ने घटनास्थल पर पहुंचकर नए सिरे से जांच शुरू की। स्थानीय लोगों से भी साक्ष्य और जानकारी देने की अपील की गई।
जांच के दौरान एफएसएल टीम के सदस्यों और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक से दोबारा पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि एफएसएल की शुरुआती रिपोर्ट में ही गला घोंटकर हत्या किए जाने के संकेत मिले थे।
हालांकि तत्कालीन अनुसंधानकर्ता ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार बनाकर मामले को आत्महत्या मान लिया। दोबारा जांच में यह स्पष्ट हो गया कि रिंकू देवी की पहले गला दबाकर हत्या की गई और बाद में शव को फंदे से लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
15 लाख रुपये के लेन-देन बना हत्या की वजह
जांच में हत्या के पीछे आर्थिक विवाद का भी खुलासा हुआ है। आईजी विकास वैभव के अनुसार, मृतका की पुत्री तेजस्विनी ने आरोप लगाया था कि गांव के कौशल कुमार और एक अन्य व्यक्ति ने दो वर्ष पहले जमीन का निबंधन कराने के नाम पर उनसे 15 लाख रुपये लिए थे।
जब तय समय पर जमीन का निबंधन नहीं हुआ तो गांव में पंचायत बुलाई गई। चार अप्रैल 2021 को ही रुपये लौटाने की बात तय हुई थी। एसआईटी का दावा है कि इसी विवाद के चलते उसी दिन रिंकू देवी की हत्या कर दी गई।
जांच के दौरान कौशल कुमार द्वारा रुपये लेने के साक्ष्य भी मिले हैं। वहीं विद्यालय के आदेशपाल अजीत कुमार बबलू की मौजूदगी और भूमिका भी सामने आई है, जिसके आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया।
बेटी ने जताया जांच टीम का आभार
आईजी विकास वैभव ने बताया कि इस विशेष जांच दल में बेगूसराय रेंज के डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा, अशोक झा, निहार भूषण, अमरेंद्र कुमार सहित कई अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रेस वार्ता में डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा, बेगूसराय के एसपी मनीष कुमार समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। वहीं मृतका की पुत्री तेजस्विनी ने मामले में न्याय मिलने पर विशेष जांच दल और न्यायालय का आभार व्यक्त किया। लंबे इंतजार के बाद हुई इस कार्रवाई से परिवार ने राहत की सांस ली है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

