‘माता-पिता की जगह मोबाइल ले रहा है, यह गंभीर आपदा’; संयुक्त परिवार व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
नई दिल्ली। संयुक्त परिवार व्यवस्था और बच्चों के पालन-पोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन धीरे-धीरे माता-पिता की भूमिका की जगह लेता जा रहा है, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने इसे एक तरह की “आपदा” बताते हुए कहा कि इसका असर बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संयुक्त परिवार व्यवस्था भारतीय समाज की मजबूत पहचान रही है, जहां बच्चों को माता-पिता के साथ-साथ दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों का भी स्नेह, मार्गदर्शन और संस्कार मिलते हैं। हालांकि बदलती जीवनशैली और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के बीच बच्चों का अधिक समय मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों के साथ बीत रहा है।
अदालत ने कहा कि तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन उसका अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के समग्र विकास के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में परिवारों को बच्चों के साथ अधिक समय बिताने, संवाद बढ़ाने और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को बदलती सामाजिक परिस्थितियों और बच्चों पर बढ़ते डिजिटल प्रभाव के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

