कुछ रिश्ते खून से नहीं, बल्कि भरोसे, अपनापन और साथ निभाने से बनते हैं। राजौरी में रहने वाले जावेद अहमद और विकास अहमद की दोस्ती भी कुछ ऐसी ही थी। दोनों के सपने एक थे, मंजिल एक थी और संघर्ष भी लगभग एक था। लेकिन शनिवार की देर रात आई बाढ़ ने दोनों दोस्तों की जिंदगी लील ली। कभी साथ रहने वाले दोनों दोस्तों के शव 50 किलोमीटर की दूरी पर मिले।
इस दोस्ती का दर्दनाक अंत सुनकर क्षेत्र में हर किसी की आंखें नम हो रही हैं। राजौरी शहर के मलिक मार्केट में एक छोटे से किराए के कमरे में रहकर दोनों युवा अपनी पढ़ाई कर रहे थे। घर से दूर रहकर वे बेहतर भविष्य का सपना बुन रहे थे। सुबह पढ़ाई, शाम को जिम और फिर रात को साथ बैठकर खाना बनाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था।
दोनों एक-दूसरे के इतने करीब थे कि आसपास रहने वाले लोग भी उन्हें सगे भाइयों की तरह जानते थे। लेकिन शनिवार की देर रात आसमान से बरसी आफत ने सब कुछ खत्म कर दिया।
लगातार हो रही मूसलधार बारिश का पानी बाढ़ की शक्ल में मलिक मार्केट तक पहुंच गया। जिस कमरे में दोनों युवा रह रहे थे, उसकी दीवार भरभराकर गिर गई और दोनों तेज बहाव में बह गए। रात के अंधेरे में लोगों ने चीख-पुकार सुनी, लेकिन तेज बहाव के सामने हर कोई बेबस था।
रविवार सुबह से पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों ने दोनों युवकों की तलाश शुरू की। सोमवार की दोपहर पहले विकास अहमद का शव राजौरी के सलानी पुल के पास मिला। जबकि घंटों बाद जावेद अहमद का भी शव राजौरी से करीब 50 किलोमीटर दूर नौशहरा के दब्बड़ क्षेत्र में बरामद हुआ। ये सुनते ही दोनों परिवारों में मातम छा गया। जिन बेटों के लौटने का इंतजार मां-बाप हर शाम किया करते थे, वे अब सफेद कफन में लौटे।
परिवार वाले बेसुध थे। पड़ोसियों ने बताया कि दोनों बेहद शांत, मेहनती और मिलनसार थे। ऐसी दर्दनाक प्राकृतिक आपदाएं केवल घर और सामान ही नहीं उजाड़तीं, बल्कि परिवारों के सपने, मां-बाप की उम्मीदें और दोस्ती की सबसे खूबसूरत कहानियां भी अपने साथ बहा ले जाती हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

