10 में से 9 भारतीयों के दिल पर मंडरा रहा है खतरा! बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे नसों में जमा हो रहा है फैट

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क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर में एक ऐसी समस्या पनप रही है, जिसके कोई लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन इसका असर सीधे हमारे दिल पर होता है? हम बात कर रहे हैं ब्लड में लिपिड की असमान्य मात्रा की। जी हां, ICMR-INDIAB की एक स्टडी में पता चला है कि भारत में 10 में से 9 वयस्कों के शरीर में कम से कम एक ब्लड लिपिड यानी फैट खराब स्तर पर है।

इसे मेडिकल भाषा में डिस्लिपिडेमिया कहा जाता है, जिसमें ब्लड लिपिड, जैसे- कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स जैसे फैट्स का स्तर बढ़ जाता है। ये हमारे देश में दिल की बीमारियों से जुड़े सबसे बड़े खतरों में से एक है, लेकिन इससे भी खतरनाक बात यह है कि इस ओर हम काफी कम ध्यान देते हैं।

किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा?

इस स्टडी के मुताबिक, यह समस्या सिर्फ एक वर्ग तक सीमित नहीं है, लेकिन हां, कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा देखा गया है। शहरी लोगों और महिलाओं में डिस्लिपिडेमिया की समस्या ज्यादा देखी गई है। इसके अलावा, मध्य भारत में डिस्लिपिडेमिया के मामले सबसे ज्यादा देखे गए, जबकि नॉर्थईस्ट में इसके मामले सबसे कम पाए गए।

हालांकि, जिन इलाकों में इसके मामले कम थे, वहां भी 10 में से 8 लोग इस समस्या से प्रभावित थे। कुछ मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे लोगों में भी इसके मामले ज्यादा देखने मिले, जैसे प्री-डायबिटीज, डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोग।

बिना लक्षणों के होता है नुकसान

डिस्लिपिडेमिया की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते। इस स्टडी के सीनियर ऑथर और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. वी मोहन कहते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स का पता नहीं चलता। टेस्ट रिपोर्ट में दिखने वाले ये आंकड़े धीरे-धीरे आर्टरीज में प्लाम जमा करते हैं, जो बाद में फट सकते हैं या दिल या दिमाग में खून का बहाव रोक सकते हैं।

गुड कोलेस्ट्रॉल की भारी कमी

जर्नल ऑफ क्लिनिकल लिपिडोलॉजी में पब्लिश हुई इस स्टडी में 23,665 लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि 66.8% वयस्कों में गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम था, जो खून से फैट को साफ करने में मदद करता है।

वहीं 49.4% वयस्कों में बैड कोलेस्ट्रॉल और 29.5% वयस्कों में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया। इस स्टडी में यह पता चला कि जैसे ही व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स बिगड़ता है, यह समस्या और तेजी से बढ़ती है।

अब 30 की उम्र से ही बढ़ रहा खतरा

डिस्लिपिडेमिया की समस्या अब ज्यादातर भारतीयों में आम हो चुकी है और चिंता की बात है कि इसकी शुरुआत अक्सर लोगों में 30 की उम्र में ही हो जाती है। ये समस्या भारत में पैर पसार रही डायबिटीज, मोटापे और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से सीधी जुड़ चुकी है।

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