मोबाइल फोन चला रहे किशोर को सांप ने डसा, औरैया में घरेलू उपचार और झाड़-फूंक के चक्कर में गई जान

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घर के दरवाजे के पास मोबाइल फोन चला रहे एक किशोर को सांप ने डस लिया। तेज दर्द और घबराहट होने पर किशोर मां के पास पहुंचा और घटना बताई। स्वजन ने पहले घरेलू उपचार का सहारा लिया। सपेरे को बुलवाकर सांप को पकड़वा प्लास्टिक के डिब्बे में बंद करा दिया।

हालत में सुधार न होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अछल्दा ले गए। जहां से मेडिकल कॉलेज चिचौली की इमरजेंसी के लिए रेफर किया गया।

इन सब के दौरान ज्यादा समय बीतने से मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई। जिससे स्वजन बेहाल हो गए। घर आने के बाद वह झाड़-फूंक कराने के लिए मध्य प्रदेश के दतिया के लिए निकल गए। जहां जाकर भी उन्हें वापस लौटना पड़ा।

घटना गांव लिधौरा में शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे की है। 13 वर्षीय अंश पुत्र नीलेश कुमार शाक्य घर के दरवाजे के पास बैठकर मोबाइल चला रहा था। इसी दौरान सांप ने उसके पैर में डस लिया। सर्पदंश के बाद उसने पैर में तेज दर्द होने पर मां स्वाती को घटना की जानकारी दी।

घरेलू उपचार के चक्कर में पड़ने से अस्पताल पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे की देरी हो गई। सीएचसी में डा. ललित मोहन ने प्राथमिक उपचार देने के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज ले जाने की बात कही। स्वजन एंबुलेंस से पहुंचे। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने सर्पदंश की स्थिति में घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दी है।

पिता अहमदाबाद में करते हैं मजदूरी

अंश के पिता नीलेश कुमार शाक्य अहमदाबाद में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घटना के समय वह अहमदाबाद में ही थे। अंश गांव में अपनी मां स्वाती और आठ वर्षीय छोटे भाई दिव्यांशु के साथ रहता था। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही पिता गांव के लिए रवाना हो गए।

सपेरे ने पकड़ा सांप, लेकिन नहीं बच सकी जान

सर्पदंश के बाद स्वजन ने सपेरे को बुलवाकर सांप को पकड़वा लिया। हालांकि तब तक अस्पताल पहुंचने में काफी देर हो चुकी थी। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना ही मरीज की जान बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

डाक्टरों ने मृत घोषित किया, फिर भी पहुंचे रतनगढ़ दतिया माता

मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों द्वारा अंश को मृत घोषित किए जाने के बाद भी स्वजन की उम्मीद पूरी तरह नहीं टूटी। ग्रामीणों के अनुसार परिवार के लोगों को विश्वास था कि शायद कोई चमत्कार हो जाए।

इसी आस में वे किशोर के शव को लेकर रतनगढ़ माता मंदिर दतिया पहुंचे। हालांकि वहां भी उनकी उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। अंततः स्वजन भारी मन से शव लेकर गांव के लिए लौट गए।

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