बेहतर भविष्य का सपना हर कोई देखता है। सपने उन आंखों में भी पलते हैं, जिनमें रोशनी नहीं होती। कई बार परिस्थितियां और सामाजिक पूर्वाग्रह बालिकाओं के कदम रोक देते हैं, लेकिन यदि एक संवेदनशील शिक्षक उनका हाथ थाम ले, तो वही बच्चे नई उड़ान भरने लगते हैं।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरौली की शिक्षिका प्रीती पाल ऐसी ही प्रेरक शिक्षिका हैं, जो शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, साहस और आत्मसम्मान की लौ जलाने का काम कर रही हैं। उपलब्धि है इस वर्ष विद्यालय के तीन छात्रों अंश गौड़, संजना और प्रिया ने राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति (एनएमएमएस) परीक्षा में सफलता हासिल करना।
विद्यालय में दृष्टिबाधित छात्रा चांदनी के प्रवेश के समय परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं। विद्यालय का माहौल उसे नहीं भाता था जिससे वह नियमित रूप से स्कूल नहीं आ पाती थी। ऐसे समय में प्रीती ने केवल शिक्षिका की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि अभिभावक की तरह उसका संबल बनीं। उन्होंने चांदनी को जूडो और अन्य गतिविधियों से जोड़ा, ताकि उसका आत्मविश्वास बढ़ सके। आज वही चांदनी सामान्य छात्राओं के साथ आत्मरक्षा प्रशिक्षण ले रही है और पूरे उत्साह के साथ विद्यालय आ रही है।
अब चांदनी यह महसूस करने लगी है कि वह किसी पर बोझ नहीं, बल्कि अपने दम पर आगे बढ़ सकती है। इस बदलाव के पीछे शिक्षिका का धैर्य, संवेदनशीलता और सतत प्रयास है। उन्होंने छात्रा के अभिभावकों को भी विद्यालय के सकारात्मक वातावरण और शिक्षण व्यवस्था पर भरोसा दिलाया।
यही प्रयास अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों, विशेषकर इरशाद जैसे बच्चों के परिवारों के बीच भी किया गया। शिक्षिका प्रीती अपने नवाचारों से पढ़ाई को रोचक और सहज बनाती हैं। साथ ही बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देती हैं। जनपद स्तर पर शारीरिक शिक्षा की श्रेष्ठ शिक्षिकाओं में उनकी पहचान है।
उनके नेतृत्व में विद्यालय की बालिका टीम प्रदेश स्तर तक खो-खो और जूडो प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमन कहती हैं कि विद्यालय परिवार अपने दायित्वों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बीएसए धीरेन्द्र त्रिपाठी कहते हैं कि एक सशक्त शिक्षिका ही जागरूक, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी छात्रा का निर्माण कर सकती है। प्रीती का कार्य इसी सोच को साकार करता दिखाई देता है।


