डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस में स्टाफ की भारी संकट, 25 साल के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंची वैकेंसी रेट; हर 10 में से 3 पद खाली

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डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए नियमों को सख्त कर दिया है। लेकिन भारत के अंतरिक्ष विभाग के अंदर एक और भी बड़ी चुनौती चुपचाप आकार ले रही है, और वह कर्मचारियों की भारी कमी है।

हालिया डेटा के अनुसार, 2025-26 के अंत तक प्रत्येक 10 स्वीकृत पदों में से लगभग 3 पद खाली हैं। यह कम से कम पिछले 25 वर्षों में कर्मचारियों की सबसे बड़ी कमी है। 20,269 स्वीकृत पदों के मुकाबले, अंतरिक्ष विभाग में वर्तमान में केवल 14,637 कर्मचारी हैं, जिसका मतलब है कि 5,632 पद रिक्त हैं और कर्मचारियों का स्तर मात्र 72.2% है।

2025-26 में कर्मचारियों की संख्या 14,637, वर्ष 2001-02 की संख्या 14,847 से भी कम है। एक मुख्य अंतर यह है कि 2001-02 में स्वीकृत पद केवल 16,423 थे, जिसके कारण तब रिक्ति दर 10% से भी कम थी।

लगातार आ रही गिरावट

पिछले कुछ वर्षों में रिक्ति दर लगातार खराब हुई है। 2019-20 में अंतरिक्ष विभाग में 20,039 स्वीकृत पदों के मुकाबले 17,222 कर्मचारी लगभग 86% स्टाफिंग थे।

छह साल बाद, स्वीकृत पदों की संख्या लगभग वैसी ही है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या लगभग 2,600 घटकर 14,637 रह गई है। 2019-20 के बाद से हर साल कर्मचारियों के स्तर में गिरावट आई है। यह 2024-25 में गिरकर 71.7% के निचले स्तर पर पहुंच गया था, हालांकि 2025-26 में इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई है।

विभाग के कुल कार्यबल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों का है। इसलिए, इन रिक्तियों का सीधा और बुरा असर उन इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों पर पड़ रहा है जो सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल और डीप-स्पेस मिशन डिजाइन करते हैं।

महत्वाकांक्षी मिशनों पर पड़ रहा असर

यह मानव संसाधन संकट ऐसे समय में सामने आया है जब भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अपने सबसे व्यस्त दौर से गुजर रहा है। इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने गगनयान, चंद्रमा पर जाने और अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने जैसी बड़ी योजनाएं पाइपलाइन में हैं।

इसके अलावा, इसरो नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल पर काम कर रहा है, जो आंशिक रूप से दोबारा इस्तेमाल होने वाला रॉकेट होगा। साथ ही, दूसरे मंगल मिशन और पहले शुक्र मिशन की योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं। निजी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने के बावजूद, रणनीतिक और बड़े मिशनों का मुख्य भार अभी भी इसरो के ही कंधों पर है।

कोविड-19 और सुधारों का प्रभाव

हाल ही में एक संसदीय समिति ने कर्मचारियों की इस भारी कमी के मुद्दे पर विचार किया और मानव संसाधन की भारी कमी के कारणों और समस्या के समाधान के लिए किए गए उपायों के बारे में जानकारी मांगी।

इसके जवाब में, अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने कहा कि यह बैकलॉग मुख्य रूप से 2020-21 के बाद से कोविड-19 प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुधारों को लागू करने और भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने के कारण हुआ है। विभाग के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया अक्टूबर 2023 के बाद ही दोबारा शुरू की जा सकी, जिससे लगभग 2-3 वर्षों तक भर्तियों में एक बड़ा अंतराल आ गया।

अंतरिक्ष विभाग ने जानकारी दी है कि 1,449 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसके अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके अलावा 933 अन्य पदों को दिसंबर 2026 तक भरा जाना है। बाकी बची रिक्तियों में पूर्व ग्रुप डी के पद और वे पद शामिल हैं जिन्हें दूसरे कैडर रिव्यू के लागू होने के बाद भरा जाएगा।

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