‘मंशा गलत नहीं थी’, सीता पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले भजन संध्या संचालक को MP हाई कोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

1347 Shares

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सिवनी जिले में आयोजित एक भजन संध्या के संचालक को सीता पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में अग्रिम जमानत दे दी।

कोर्ट ने कहा कि रामचरितमानस की चौपाई की व्याख्या करते समय आवेदक द्वारा शब्दों का चयन उचित नहीं रहा हो सकता है, लेकिन प्रथमदृष्टया उसकी मंशा वैसी नहीं दिखती, जैसा अभियोजन पक्ष आरोपित कर रहा है। न्यायालय ने यह भी दोहराया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान का मौलिक अधिकार है और उसकी रक्षा करना अदालतों का दायित्व है।

यह है मामला

सिवनी जिले में आयोजित एक भजन संध्या के दौरान रामचरितमानस की चौपाई की व्याख्या करते समय सीता के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने पर संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) एवं 353(3) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। आरोप था कि धार्मिक समारोह में दिए गए कथन से समुदायों के बीच वैमनस्य फैल सकता है और धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं। इसके बाद आरोपी ने गिरफ्तारी से संरक्षण के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने कहा कि किसी कथन की भाषा या शब्दों से असहमति अलग बात है, लेकिन केवल उसी आधार पर आपराधिक मंशा नहीं मानी जा सकती। प्रथम दृष्टया ऐसा कोई आधार नहीं दिखता कि आवेदक का उद्देश्य वैमनस्य फैलाना था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हाई कोर्ट ने इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार न्यायाधीशों को बोले या लिखे गए शब्द पसंद नहीं आते, फिर भी संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना उनका संवैधानिक दायित्व है। न्यायालय संविधान और उसके आदर्शों के प्रति उत्तरदायी हैं।

प्वाइंटर

  • सिवनी जिले की भजन संध्या से जुड़ा मामला।
  • बीएनएस की धारा 353(2) एवं 353(3) के तहत अपराध दर्ज।
  • न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने दी राहत।
  • कोर्ट ने कहा- शब्द अनुचित हो सकते हैं, पर प्रथम दृष्टया आपराधिक मंशा नहीं।
  • सुप्रीम कोर्ट के इमरान प्रतापगढ़ी फैसले का दिया हवाला।
  • अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार, गिरफ्तारी से संरक्षण।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *