तहसील स्टांप ड्यूटी घोटाले में जेई और दो पटवारियों पर गिरेगी गाज, सरकारी खजाने को लगाया लाखों का चूना
तहसील कार्यालय में स्टांप ड्यूटी घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय की विजिलेंस-2 शाखा ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच रिपोर्ट के आधार पर जेई व दो पटवारियाें पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
लिखे गए पत्र में जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) के जूनियर इंजीनियर कृष्ण कुमार, तत्कालीन पटवारी रामनिवास और राजस्व विभाग तत्कालीन पटवारी ओम प्रकाश के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।
कार्रवाई के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव कार्यालय से पत्र जारी कर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैंं।
सिद्धार्थ कॉलोनी निवासी एडवोकेट मोहित खंडेलवाल ने 2020 में आरटीआई के जरिए कॉलोनी की जमीन से संबंधित जानकारी मांगी थी, जिसमें सामने आया था कि कॉलोनी के किला नंबर-26 के 7/1 में जो रजिस्ट्री की गई है, उनमें स्टांप ड्यूटी चोरी की गई है।
सरकारी खजाने को पहुंचाया लाखों का नुकसान
वर्ष 2015 में तीन सितंबर को हुई रजिस्ट्री संख्या 6039 में न तो कोई रजिस्ट्री फीस ली गई और न ही स्टांप ड्यूटी ली गई। ऐसा कर अधिकारियों ने सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान किया गया, जबकि उसकी किला नंबर में की गई अन्य रजिस्ट्रियों में रजिस्ट्रेशन फीस व स्टांप ड्यूटी का भुगतान किया था।
रजिस्ट्री नंबर-6039 से करीब चार साल पहले हुई रजिस्ट्री नंबर 4744 में 200 वर्ग गज के प्लॉट के लिए खरीदार ने 25 हजार रुपये स्टांप ड्यूटी अदा की थी, जबकि चार साल बाद रजिस्ट्री नंबर-6039 करवाने वाले पर अधिकारियों ने मेहरबानी दिखाई थी। शिकायत के बाद कई स्तर पर मामले की जांच हुई।
अब स्टांप ड्यूटी घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय की विजिलेंस-2 शाखा ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की सिफारिशों को स्वीकार किया है, जिसकी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन पटवारी रामनिवास, जूनियर इंजीनियर कृष्ण कुमार और तत्कालीन पटवारी ओमप्रकाश के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के तहत विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
ऐसे ताक पर रखे गए थे नियम
ओमप्रकाश चौटाला की सरकार के समय 2004 में सिद्धार्थ कॉलोनी को वैध किया था। इसके बाद वहां की सारी जमीन स्वयत ही रिहायशी श्रेणी में तबदील हो गई थी। इसके बाद तीन सितंबर, 2015 को 15 सौ गज जमीन की रजिस्ट्री नंबर-6039 की गई तो चाही (जमीन कृषि योग्य) भूमि बताकर उसकी रजिस्ट्री की गई।
नियम के मुताबिक उस व्यक्ति को स्टांप ड्यूटी का फायदा दिया जा सकता है, जिसकी एक साल के अंदर सरकार ने प्रदेश में कहीं जमीन अधिगृहित की हो और वह किसी अन्य इलाके में कृषि योग्य भूमि खरीद रहा हो, लेकिन तहसील कार्यालय के अधिकारियों ने रिहायशी कॉलोनी की रजिस्ट्री में खेल कर स्टांप ड्यूटी घोटाला किया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

