मोक्ष नगरी गयाजी में बनेंगे भव्य प्रवेश द्वार, पितृपक्ष से पहले मिलेगा नया आकर्षक स्वरूप

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गयाजी एक ऐतिहासिक और धार्मिक शहर के रूप में देश-विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है। इसे मोक्ष की भूमि भी कहा जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में पिंडदानी अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने पहुंचते हैं।

ऐसे में शहर की धार्मिक महत्ता के अनुरूप इसे और आकर्षक व व्यवस्थित बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब गयाजी में प्रवेश करते ही तीर्थयात्रियों और आम लोगों को इस पवित्र नगरी का भव्य स्वागत देखने को मिलेगा।

नगर निगम ने शहर के तीन प्रमुख स्थानों पर भव्य प्रवेश द्वार के निर्माण का निर्णय लिया है। इस योजना की सभी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और आगामी एक पखवारे के भीतर निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।

लक्ष्य है कि ये तीनों प्रवेश द्वार पितृपक्ष मेले से पहले तैयार हो जाएं, ताकि देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को शहर का एक नया और आकर्षक स्वरूप देखने को मिले।

तीन प्रमुख स्थानों पर बनेंगे प्रवेश द्वार

नगर निगम के अनुसार पहला प्रवेश द्वार मानपुर स्थित सीताकुंड के पास बनाया जाएगा, जिसके निर्माण पर करीब 80 लाख रुपये खर्च होंगे। वहीं, दूसरा प्रवेश द्वार सिकड़िया मोड़ के पास और तीसरा कंडी बाइपास के पास बनाया जाएगा। जिन पर 60-60 लाख रुपये की लागत आएगी।

इन तीनों स्थानों का चयन शहर में प्रवेश के प्रमुख मार्गों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि हर आने-जाने वाले व्यक्ति को गयाजी की पहचान का अहसास हो सके। इ

न प्रवेश द्वारों की खासियत यह होगी कि इनमें धार्मिक आस्था की झलक भी देखने को मिलेगी। द्वारों पर भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणों के साथ भगवान बुद्ध की आकर्षक चित्रकारी अंकित की जाएगी जो गयाजी की आध्यात्मिक विरासत को दर्शाएगी।

रंगीन रोशनी और हरियाली से बढ़ेगी खूबसूरती

प्रवेश द्वारों का निर्माण पीले पत्थरों से किया जाएगा। जिससे इन्हें पारंपरिक और भव्य रूप दिया जा सके। रात के समय इन द्वारों को रंगीन रोशनी से सजाया जाएगा, जिससे ये दूर से ही आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

इसके अलावा प्रवेश द्वारों के आसपास हरियाली विकसित करने के लिए पौधारोपण और घास लगाने की भी योजना है। इससे न केवल सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।

यह पहल शहर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देगी। प्रवेश द्वार गयाजी की पहचान के प्रतीक के रूप में विकसित होंगे।

प्राचीन परंपरा की झलक भी होगी जीवंत

गयाजी का इतिहास भी प्रवेश द्वारों की परंपरा से जुड़ा रहा है। गयापाल पुरोहित महेश लाल गुपुत बताते हैं कि प्राचीन काल में गयाजी में चार प्रमुख फाटक हुआ करते थे, जिनके भीतर ही शहर का विस्तार माना जाता था। ये फाटक ब्राह्मणी घाट, देवघाट, दक्षिण दरवाजा और चांद-चौरा के पास स्थित थे जो आज भी किसी न किसी रूप में मौजूद हैं।

इन फाटकों के भीतर 14 बैठकें होती थीं। जहां गयापाल पुरोहित आपस में विचार-विमर्श, संगीत, व्यायाम और कुश्ती जैसी गतिविधियां करते थे। रात के समय इन चारों फाटकों को बंद कर दिया जाता था, जिससे शहर की सुरक्षा सुनिश्चित होती थी।

आज नगर निगम की यह नई पहल उसी ऐतिहासिक परंपरा को आधुनिक स्वरूप में पुनर्जीवित करने की दिशा में एक सार्थक कदम मानी जा रही है।

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