राज्य सरकार अब मृत रैयतों की जमाबंदी स्वयं अपडेट करेगी। ऐसे रैयतों के उत्तराधिकारियों को अपने नाम से दाखिल-खारिज कराने के लिए अंचल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इससे संबंधित दिशा निर्देश प्रमंडलीय आयुक्तों एवं जिलाधिकारियों को भेज दिया है।
विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सोमवार को कहा कि सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण अपने वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े।
मृत रैयतों के नाम पर वर्षों तक जमाबंदी लंबित रहने से पारिवारिक विवाद, मुकदमेबाजी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है। अब सरकार स्वयं पहल कर ऐसे मामलों का निबटारा कराएगी। यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित मौजा के ऐसे सभी मामलों का निबटारा न हो जाए।
उन्होंने कहा कि राजस्व कर्मचारी जन्म-मृत्यु निबंधन अभिलेख, चौकीदारी रिपोर्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे। आवश्यक जांच के बाद उत्तराधिकारियों से संपर्क कर दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे।
यदि निर्धारित समय में बंटवारे से संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं होते हैं, तब भी केवल उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। पूरी प्रक्रिया बिहारभूमि पोर्टल पर अनलाइन माध्यम से पूरी होगी।
डॉ. जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सूचना आधारित उत्तराधिकार दाखिल-खारिज मामलों की नियमित निगरानी की जाए।
अंचल अधिकारी प्रत्येक माह लक्ष्य तय करेंगे, जबकि अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता हर माह के प्रथम सप्ताह में अंचलवार समीक्षा करेंगे। साप्ताहिक समीक्षा बैठकों में भी इन मामलों की प्रगति की अनिवार्य समीक्षा होगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

