राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ)-2023 की मंशा के अनुरूप प्रदेश के 29,000 से ज्यादा विद्यालयों में पठन-पाठन के पैटर्न में बदलाव के लिए राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (एससीएफ) का नया ड्राफ्ट तैयार करेगा।
यह कार्यशाला यूपी बोर्ड में छह से 10 जुलाई के मध्य आयोजित की गई है। इस संबंध में जिन पहलुओं पर कार्य किया जाना है, उसके लिए एनसीएफ का अध्ययन कर उन क्षेत्रों का चिह्नांकन किया जा चुका है। इसमें लक्ष्य व दृष्टिकोण, विद्यालयीय संस्कृति, वातावरण सृजन, कार्य सृजन के संदर्भ में विशेषज्ञों से विमर्श कर ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
यूपी बोर्ड के अपर सचिव (पाठ्यपुस्तक) स्कंद शुक्ल ने बताया कि पांच दिवसीय कार्यशाला में पाठ्यचर्या व पाठ्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञ, यूपी बोर्ड के साहित्यिक सहायक व शोध सहायकों के साथ-साथ कुछ विशेषज्ञ शिक्षकों को बुलाया गया है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह के निर्देशन में आयोजित कार्यशाला में तैयार किए जाने वाले ड्राफ्ट के अनुरूप आगे की कार्ययोजना निर्धारित की जाएगी।
उसी अनुरूप विद्यालयी वातावरण की रूपरेखा तैयार करने के साथ-साथ शिक्षकों के प्रशिक्षण की योजना निश्चित की जाएगी, ताकि वह नए पैटर्न पर विद्यालयों में शिक्षण देने के लिए तैयार हो सकें। इस क्रम में कुल चार प्रमुख कार्यशालाएं आयोजित की जानी हैं।
पाठ्यचर्या और पाठ्यक्रम में यह अंतर अपर सचिव ने विषय को स्पष्ट कर बताया कि पाठ्यचर्या (कैरिकुलम) किसी शैक्षिक संस्थान या कार्यक्रम का संपूर्ण दायरा है, जिसमें कक्षा के अंदर और बाहर होने वाली सभी गतिविधियां (जैसे खेल, प्रयोगशाला, पुस्तकालय) शामिल हैं। इसके विपरीत, पाठ्यक्रम (सिलेबस) पाठ्यचर्या का एक छोटा हिस्सा होता है, जो किसी एक विशिष्ट विषय का संक्षिप्त विवरण होता है और वह इसमें उस विषय के अध्यायों और प्रकरणों की रूपरेखा होता है जो किसी कक्षा में पढ़ाए जाते हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

