कमियों की पहचान के लिए अध्ययन करा दिल्ली सरकार कर आय बढ़ाएगी। इसके लिए सरकार ने अपने प्रमुख राजस्व विभागों के कर वसूली का व्यापक आकलन कराने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (एनआइपीएफपी) को अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी है। इस अध्ययन का उद्देश्य कर प्रशासन की दक्षता का मूल्यांकन करना और राजस्व नुकसान के कारणों की पहचान करके कर संग्रह बढ़ाने के लिए व्यवहारिक सुझाव तैयार करना है।
सरकार के योजना विभाग की ओर से कराए जा रहे इस अध्ययन में आबकारी, परिवहन, व्यापार एवं कर, राजस्व विभाग तथा संपत्ति पंजीकरण जैसे प्रमुख टैक्स मदों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही यह भी परखा जाएगा कि मौजूदा कर प्रशासन और प्रवर्तन व्यवस्था कितनी प्रभावी है तथा किन स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।सरकार ने यह पहल दिल्ली के अपेक्षाकृत कम टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात को ध्यान में रखते हुए की है। वर्ष 2024-25 में दिल्ली का टैक्स-टू-ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) रेश्यो 4.9 था। 2025-26 के बजट अनुमानों के अनुसार इसके बढ़कर 5.16 प्रतिशत होने की उम्मीद है। यह अनुपात किसी अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में कर संग्रह की क्षमता को दर्शाता है और सरकार की विकास परियोजनाओं व जनकल्याण योजनाओं को वित्तपोषित करने की क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
कहां से कितनी होती है दिल्ली सरकार की कमाई?
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली सरकार के कुल व्यय का 68.7 प्रतिशत हिस्सा जीएसटी, वैट, आबकारी, स्टांप ड्यूटी और मोटर वाहन कर से प्राप्त राजस्व से पूरा होता है। वर्ष 2025-26 में कुल कर राजस्व में जीएसटी की हिस्सेदारी 71.3 प्रतिशत, स्टांप ड्यूटी 13.1 प्रतिशत, आबकारी 10.2 प्रतिशत और मोटर वाहन कर 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
अध्ययन के दौरान अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कर संग्रह प्रणाली का तुलनात्मक विश्लेषण भी किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि रिपोर्ट के आधार पर तकनीक के बेहतर उपयोग, कर प्रशासन में सुधार, प्रभावी प्रवर्तन और राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए ठोस नीति सुझाव प्राप्त होंगे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

