पक्की होंगी अवैध कॉलोनियां, रजिस्ट्री के लिए अब नहीं लगेगी NOC; पंजाब सरकार ने दी बड़ी राहत

राज्य सरकार ने आम लोगों, खासकर अवैध कॉलोनियों में घर बनाकर रह रहे हजारों परिवारों, किसानों और ग्रामीण तबके को बड़ी राहत देने वाले कई अहम फैसले लिए हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने बुधवार को बताया कि सरकार ने अवैध कॉलोनियों को नियमित करने, जमीन अधिग्रहण नीति में संशोधन करने और विभिन्न प्रमाणपत्रों पर लगने वाली सुविधा शुल्क माफ करने जैसे लोकहितैषी निर्णय लिए हैं। सरकार का दावा है कि इन फैसलों का सीधा लाभ लाखों लोगों तक पहुंचेगा।

सबसे बड़ा फैसला उन परिवारों के लिए माना जा रहा है जिन्होंने वर्षों पहले अवैध या बिना मंजूरी वाली कॉलोनियों में प्लॉट खरीदकर घर बना लिए, लेकिन कॉलोनियों की कानूनी स्थिति स्पष्ट न होने के कारण उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन गैर-कानूनी कॉलोनियों में कम से कम 25 फीसदी निर्माण हो चुका है, उन्हें रेगुलर किया जाएगा। इससे ऐसी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उनके मकानों और प्लॉटों को कानूनी पहचान मिलने का रास्ता खुल गया है।

चीमा ने बताया कि संबंधित रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, डेवलपर या कालोनी मालिक कलेक्टर रेट के आधार पर निर्धारित शुल्क जमा करवाकर कॉलोनी को रेगुलर करवा सकेंगे। रिहायशी क्षेत्र के लिए कलेक्टर रेट का मात्र 5 फीसदी और कमर्शियल क्षेत्र के लिए 10 फीसदी शुल्क देना होगा।

सरकार पहले प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी करेगी। इसके बाद साढ़े चार साल के भीतर कालोनी में जरूरी विकास कार्य जैसे सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित करनी होंगी। तय समय में विकास कार्य पूरे होने पर कालोनी को पूरी तरह नियमित माना जाएगा।

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ प्लॉट धारकों को रजिस्ट्री प्रक्रिया में मिलेगा। अभी तक अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने या बेचने के दौरान लोगों को संबंधित अथॉरिटी से एनओसी लेने की बाध्यता रहती थी, जिससे प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती थी। कई मामलों में लोग वर्षों तक रजिस्ट्री नहीं करवा पाते थे।

नई व्यवस्था के तहत जो कालोनियां इस प्रक्रिया से रेगुलर होंगी, वहां प्लॉट मालिकों को रजिस्ट्री के लिए किसी भी प्रकार की एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि यह सुविधा तभी मिलेगी जब कॉलोनी का मूल मालिक या डेवलपर सरकार की नई रेगुलराइजेशन प्रक्रिया पूरी करेगा।

कैबिनेट ने जमीन अधिग्रहण नीति में भी बड़ा बदलाव किया है, जिससे किसानों और जमीन मालिकों को अधिक लाभ मिलेगा। पहले अधिग्रहित प्रति एकड़ जमीन के बदले 1000 गज रिहायशी और 200 गज कमर्शियल प्लॉट मिलता था। अब कमर्शियल प्लॉट में 10 गज की बढ़ोतरी कर इसे 210 गज कर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति कमर्शियल प्लॉट नहीं लेना चाहता तो उसे रिहायशी प्लॉट में अतिरिक्त 30 गज का लाभ मिलेगा और कुल 1630 गज तक रिहायशी प्लॉट दिया जाएगा।

जहां केवल कमर्शियल प्रोजेक्ट विकसित किए जाने हैं, वहां पहले प्रति एकड़ 800 गज जगह मिलती थी, जिसे बढ़ाकर 840 गज कर दिया गया है। इसके अलावा जिन लोगों की एक एकड़ या उससे अधिक जमीन अधिग्रहित होगी, उन्हें बिना नीलामी सरकार के रिजर्व प्राइस पर एक अतिरिक्त प्लॉट लेने का विकल्प भी दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे विकास परियोजनाओं के दौरान किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा होगी।

आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को राहत देने के लिए सरकार ने प्रमाणपत्रों पर लगने वाली सुविधा शुल्क भी माफ कर दी है। चीमा ने बताया कि इस समय भारतीय चुनाव आयोग की ओर से वोटर सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) चलाई जा रही है। इस दौरान लोगों को बीएलओ या संबंधित अधिकारियों के पास कई दस्तावेज जमा करवाने पड़ते हैं।

इसे देखते हुए सरकार ने 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक रिहायशी प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र और शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र बनवाने पर लगने वाली सुविधा शुल्क पूरी तरह माफ कर दी है।

पहले सरकार की 120 डोर-स्टेप डिलीवरी सेवाओं के लिए 70 रुपये और अन्य सेवाओं के लिए 50 रुपये शुल्क लिया जाता था। अब इन प्रमाणपत्रों के लिए तीन महीने तक यह सेवा पूरी तरह मुफ्त रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे गरीब परिवारों, वरिष्ठ नागरिकों और दूरदराज ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को काफी राहत मिलेगी।

पंजाब सरकार का कहना है कि कैबिनेट के ये फैसले सिर्फ नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि सीधे लोगों के जीवन से जुड़े कदम हैं। अवैध कॉलोनियों में रहने वालों को कानूनी सुरक्षा, किसानों को बेहतर मुआवजा और आम नागरिकों को दस्तावेज बनवाने में राहत देकर सरकार ने चुनावी वर्ष से पहले बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

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