जहानाबाद में सामान्य से 65% कम हुई बारिश, खेतों में सूख रहे धान के बिचड़े; संकट में किसान

जिले में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चालू सीजन में अब तक जिले में औसतन महज 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य जरूरत से लगभग 65 प्रतिशत कम है। बारिश की इस भारी किल्लत के कारण जिले के पारंपरिक जलस्रोत और खेत पूरी तरह से सूखे हैं।

वर्तमान समय धान की रोपाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन पर्याप्त पानी न होने के कारण कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है।

बिचड़े 21 दिनों के भीतर रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार

कृषि विभाग के अनुसार, इस साल जिले में कुल पांच हजार हेक्टेयर भूमि में धान के बिचड़े लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें से लगभग 30 प्रतिशत बिचड़े समय पर यानी रोहिणी नक्षत्र में ही डाल दिए गए थे।

सामान्य तौर पर धान के बिचड़े 21 दिनों के भीतर रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। रोपाई का सही समय बीत जाने और बारिश न होने के कारण, खेतों में पानी के अभाव में ये बिचड़े अब सूखकर खराब होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

किसान टकटकी लगाए आसमान की ओर देख रहे हैं। लेकिन बारिश के नाम पर सिर्फ बूंदाबांदी होने से किसानो की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।

निर्बाध बिजली आपूर्ति का दावा

ऐसी गंभीर स्थिति में किसानों के सामने धान की रोपनी को जारी रखने के लिए केवल बिजली चालित पंप सेटों का ही सहारा बचा है। इसके लिए खेतों तक बिजली की निर्बाध आपूर्ति होना अनिवार्य है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्युत विभाग अलर्ट मोड पर है।

विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता नंदलाल चौधरी ने बताया की किसानों को सिंचाई में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए कृषि फीडरों से बिजली आपूर्ति को पहले के मुकाबले काफी बेहतर और सुचारू कर दिया गया है।

जिले में वर्तमान में कुल 34 कृषि फीडर सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से 3061 ट्रांसफार्मर का सफल संचालन किया जा रहा है। जो ट्रांसफार्मर खराब या जल चुके हैं, उन्हें दुरुस्त करने के काम में विभाग तेजी से जुटा हुआ है।

इसके साथ ही, सिंचाई के दौरान विद्युत मोटरों के संचालन में कोई तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए बिजली विभाग द्वारा जिले में 250 नए ट्रांसफार्मर लगाने की प्रक्रिया भी युद्धस्तर पर संचालित की जा रही है।

भूजल स्तर फिलहाल दे रहा राहत, पर भविष्य की चिंता बरकरार

कम बारिश के इस संकटकाल के बीच किसानों के लिए एकमात्र राहत की बात यह है कि जिले का औसत भूजल स्तर फिलहाल 28.4 फीट पर टिका हुआ है। जलस्तर अनुकूल होने के कारण विद्युत पंप सेटों के जरिए भूमिगत जल आसानी से बाहर आ रहा है, जिससे किसान खेतों की सिंचाई कर पा रहे हैं।

हालांकि, कृषि विशेषज्ञों और खुद किसानों का मानना है कि यह राहत अस्थायी है। यदि आने वाले कुछ दिनों में भारी बारिश नहीं होती है, तो अंधाधुंध भूजल दोहन के कारण वाटर लेवल काफी नीचे चला जाएगा। ऐसी स्थिति में मोटर पंप सेटों से पानी खींचना मुश्किल हो जाएगा और किसानों के सामने सूखे का एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *