ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना खुद को हर क्षेत्र में मजबूत कर रही है। अब ड्रोन क्षेत्र में मजबूत होने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके तहत भारत विशेष बाज बटालियन बना रहा है।
भारतीय सेना अपनी निगरानी क्षमता और ड्रोन युद्ध की तैयारियों को और मजबूत करने के लिए विशेष बाज बटालियन बना रही है। ये बटालियन फ्रंटलाइन यूनिट्स को उन्नत हवाई निगरानी, सिचुएशनल अवेयरनेस और ड्रोन संचालन की सुविधा प्रदान करेंगी।
सेना के सूत्रों ने बताया कि ‘बाज बटालियन’ सीमा निगरानी, ड्रोन युद्ध की तैयारी, संवेदनशील इलाकों में ऑपरेशनल तैयारियों और फ्रंटलाइन यूनिट्स व इंटेलिजेंस सिस्टम के बीच बेहतर समन्वय को मजबूत करेंगी।
‘बाज बटालियन’ का गठन भारतीय सेना को और अधिक तकनीक-सक्षम और भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सेना प्रमुख का बयान
मुख्य सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सोमवार को कहा कि ये बटालियन मौजूदा रिमोटली पाइलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) फ्लाइट्स पर आधारित होंगी। आरपीए यानी अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) हैं, जिन्हें रिमोट से संचालित किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार, इन बटालियनों में विशेष प्रशिक्षित जवानों का पूल होगा, जो आरपीए सिस्टम को ऑपरेट और मैनेज करेंगे। इसका उद्देश्य खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (आईएसआर) क्षमताओं को बढ़ाना है, ताकि युद्धक्षेत्र में निरंतर नजर रखी जा सके और तेज प्रतिक्रिया दी जा सके। ये बटालियन संभवतः आर्मी एविएशन कोर के अंतर्गत काम करेंगी।
क्यों उठाया यह कदम?
सेना ने हाल के संघर्षों रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन के साथ एलएसी पर तनाव और पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेते हुए यह पहल की है। इनमें ड्रोन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई थी।
जनरल द्विवेदी ने हाल ही में कहा था कि दो साल पहले भारतीय सेना के पास मात्र कुछ सौ ड्रोन थे, जो अब बढ़कर 50,000 से ज्यादा हो चुके हैं। आने वाले 2-3 वर्षों में यह संख्या और दोगुनी हो सकती है।


