प्री-मानसून दस्तक के बावजूद नदियों पर कटाव का खतरा बरकरार है। हालांकि यमुना, सोम व पथराला नदी पर 30 जून तक सभी बचाव कार्य पूर्ण करवाने थे, लेकिन 22 कार्य पूरे हो पाएं हैं जबकि 12 अभी अधूरे हैं।
सबसे अधिक नुकसान झेल चुके गांव कमालपुर में कटाव रोकने के लिए अभी पत्थर भी पूरा नहीं हो पाया है। इस बार पत्थर के 34 कार्य होने हैं। इन पर करी 43 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इन कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करवाने के लिए डीसी प्रीति की ओर से बार-बार निर्देश जारी किए गए।
यहां तक संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को भी नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई। बावजूद इसके कार्य अधर में हैं। नदियाें में तेज बहाव की स्थिति में कटाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
एसडीएम की निगरानी में भी खामियां
डीसी की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि बाढ़ से बचाव के कार्यों पर संबंधित एसडीएम अपने-अपने क्षेत्र में नजर रखेंगे। निरीक्षण कर भी रहें हैं, लेकिन उनकी निगरानी में भी खामियां सामने आ रहे हैं। गांव कमालपुर यमुना नदी के तट पर बसा है। बीते वर्ष यहां कटाव आबादी तक पहुंच गया था।
ग्रामीणों ने पलायन शुरू कर दिया था। बावजूद इसके यहां कटाव से बचाव के लिए होने वाले कार्यों को लेकर प्रशासनिक अधिकारी गंभीर नहीं है। इस गांव में अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है। दूसरा, गुमथला क्षेत्र में यमुना नहर के किनारों पर होने वाले कार्यों में छोटे पत्थर प्रयोग करने के आरोप लग रहे हैं।
बाढ़ के लिहाज से जिला अतिसंवेदनशील
बाढ़ के लिहाज से यमुनानगर जिला अतिसंवेदनशील माना जाता है। यमुना नदी में आए ऊफान के कारण हथनीकुंड बैराज से लेकर गुमथला राव तक सैकड़ों हर साल प्रभावित होते हैं। खेतों के साथ-साथ यमुना से सटे गांवों तक पानी पहुंच जाता है। भूमि कटाव के साथ-साथ खतरा आबादी तक पहुंच जाता है।
इसी प्रकार सोम व पथराला भी जमकर तबाही मचाती है। साढौरा, जगाधरी, यमुनानगर और रादौर चारों विधानसभा क्षेत्रों के गांव प्रभावित होते हैं। जगाधरी और रादौर विधानसभा क्षेत्र के किसानों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। आबादी और कृषि योग्य भूमि को बाढ़ से बचाने के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
इन गांवों रहता अधिक खतरा
माली माजरा, नवाजपुर, लाक्कड़, लेदी, बेलगढ़, टापू कमालपुर, ओदरी, लापरा, बीबीपुर, मांडेवाला, खानूवाला, आंबवाली, टिब्बड़ियों, काटरवाली, रामपुर गेंडा, रणजीत पुर, भंगेड़ा, मलिकपुर, रणजीतपुर, मुजाफत, नगली, प्रलादपुर, पौबारी, संधाला, संधाली, लालछप्पर, माडल टाऊन करेहड़ा, उन्हेड़ी, संधाला, संधाली, गुमथला समेत दर्जनों गांवों में हर वर्ष बाढ़ का खतरा रहता है। कई गांवों में आबादी तक पानी घुस जाता है
भाकिसं के प्रदेश प्रवक्ता टापू कमालपुर निवासी विकास राणा का कहना है कि बाढ़ बचाव कार्यों को लेकर सिंचाई विभाग गंभीर नहीं है। गांव कमालपुर में अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया। जबकि 30 जून तक कार्य पूरा करने का दावा किया जा रहा था। सुरक्षा के लिहाज से यह कार्य मानसून सीजन से पहले पूरे हो जाने चाहिए थे।
उन्हेड़ी निवासी रामबीर सिंह चौहान का कहना है कि नदियों में बाढ़ के कारण हुए नुकसान को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। बचाव कार्यों में खानापूर्ति की जाती है। अवैध खनन के कारण यमुना नदी में कटाव का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
मानसून सीजन में कटाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से बचाव कार्य करवाए जाते हैं। यह कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाते। इस बार भी ऐसा ही हुआ। अब वर्षा होने पर आनन-फानन में कार्य किए जाएंगे।
सिंचाई विभाग के एक्सइएन राहिल सैनी ने कहा कि बाढ़ से बचाव के कार्य प्रगति पर हैं। 22 कार्य पूरे हो चुके हैं। बाकी जल्द पूरे करवा दिए जाएंगे। साइटों पर पत्थर पहुंच गया है। बड़े कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हुए हैं कि इन कार्यों में गुणवत्ता का विशेष रूप से ख्याल रखा जाए।


