लखनऊ अग्निकांड: ऊपर मदद के लिए चीख रहे थे लोग, नीचे भीड़ लाचार… चश्मदीद ने बयां की खौफनाक दास्तान

 दोपहर करीब डेढ़ बजे का समय था। अलीगंज सेक्टर-डी स्थित तीन मंजिला इमारत में आग लगने की सूचना मिली तो मैं मौके की ओर दौड़ पड़ा। वहां पहुंचा तो सामने का दृश्य किसी भयावह दुःस्वप्न से कम नहीं था। इमारत के निचले हिस्से से उठ रहा काला धुआं आसमान को ढंक रहा था और कुछ ही मिनटों में आग पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले चुकी थी।
सड़क पर अफरा-तफरी मची थी। हर तरफ लोग भाग रहे थे, चीख रहे थे और ऊपर फंसे लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। तभी मेरी नजर दूसरी मंजिल की एक खिड़की पर गई।

एक युवक दोनों हाथ बाहर निकालकर मदद की गुहार लगा रहा था। उसका चेहरा डर से सफेद पड़ चुका था। वह लगातार चिल्ला रहा था, “हमें बचा लीजिए… हम अंदर फंस गए हैं।” उसके पीछे धुएं का गुबार तेजी से भर रहा था। कुछ ही देर में दूसरी और तीसरी मंजिल की खिड़कियों पर भी कई लोग दिखाई देने लगे। कोई शीशे पीट रहा था तो कोई हाथ हिलाकर नीचे खड़े लोगों से मदद मांग रहा था।

ऊपर चिल्ला रहे थे बचाने के लिए और नीचे मौजूद लोग बेबस थे

नीचे मौजूद लोगों की आंखों में भी बेबसी साफ दिखाई दे रही थी। सभी कुछ करना चाहते थे, लेकिन धुएं और आग के सामने असहाय थे। आसपास के लोगों ने सीढ़ियों के रास्ते ऊपर पहुंचने की कोशिश की, लेकिन दमघोंटू धुएं ने उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।

केबल के सहारे नीचे उतरे कुछ युवक

कुछ युवकों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ने के लिए पत्थर फेंके, मगर मजबूत कांच नहीं टूटा। इसी बीच एक युवक ने जान बचाने के लिए बिल्डिंग के बाहर लटकी केबल पकड़ ली। वह धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा। नीचे खड़े लोग सांस रोककर उसे देख रहे थे। लगभग दस मिनट की मशक्कत के बाद वह नीचे पहुंचा, लेकिन उसके पैरों में गंभीर चोट लग गई।

बाथरूम में छिप गए धुएं से बचने के लिए

उधर, इमारत के अंदर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे। कई लोग ऊपर की ओर भागे, लेकिन छत पर जाने वाले रास्ते पर ताला लगा मिला। बचने का कोई रास्ता नहीं था। कुछ लोग खुद को धुएं से बचाने के लिए बाथरूम में छिप गए। खिड़कियों से लगातार मदद की आवाजें आ रही थीं। अचानक एक युवक ऊपर से कूद गया। नीचे लगा लोहे का ग्रिल उसके शरीर से टकराया। लोगों की चीख निकल गई। उसके बाद भी कई लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगाई। सूचना मिलने के बाद पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए थे।

दमकलकर्मियों के पहुंचने से पहले इंस्पेक्टर मड़ियांव ने टीम के साथ मिलकर तोड़ी दीवार

मड़ियांव इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा, पुरनिया चौकी इंचार्ज शुभम तिवारी और उनकी टीम बगल के मकान के रास्ते इमारत तक पहुंचे। उन्होंने हथौड़े से दीवार तोड़ने का प्रयास किया ताकि धुआं बाहर निकल सके। पुलिसकर्मी अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन धुएं इतना अधिक था कि कुछ कदम आगे बढ़ना भी मुश्किल हो रहा था। समय बीत रहा था और हर मिनट भारी पड़ रहा था।

मौके पर मौजूद लोग बार-बार सड़क की ओर नजरें दौड़ाकर दमकल का इंतजार कर रहे थे। करीब एक घंटे बाद दमकल की गाड़ियां पहुंचीं। सायरन की आवाज सुनते ही लोगों में उम्मीद जगी। दमकलकर्मियों ने हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की मदद से खिड़कियों तक पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया।

दीवार तोड़कर निकाले गए सभी 15 शव

एसडीआरएफ की टीम भी पहुंच गई। लगातार पानी डाला गया और पीछे की ओर बनाई गई खुली जगह को और बड़ा किया गया। करीब चार घंटे की जद्दोजहद के बाद आग कुछ काबू में आई। स्मोक एग्जास्टर से धुआं बाहर निकाला गया। इसके बाद ऑक्सीजन सेट पहनकर राहतकर्मी अंदर दाखिल हुए। लेकिन जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया।

एक-एक कर कंबलों में लिपटे शव बाहर निकाले जाने लगे। हर शव के साथ भीड़ में सिसकियां बढ़ती चली गईं। किसी का बेटा, किसी का भाई और किसी का दोस्त अब हमेशा के लिए खामोश हो चुका था।

घटना सुनकर लोग पैदल ही घरों से निकल कर पहुंचे

इसी दौरान एक मृतक का भाई मौके पर पहुंचा। वह रोते-रोते अधिकारियों से अपने भाई का चेहरा दिखाने की गुहार लगा रहा था। उसकी चीखें सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पुलिसकर्मियों ने उसे संभालने की कोशिश की, लेकिन उसका दर्द शब्दों से कहीं बड़ा था। शाम ढलने लगी थी, लेकिन घटनास्थल पर पसरा मातम और धुएं की गंध अब भी हवा में तैर रही थी।

उस दिन मैंने सिर्फ एक इमारत में लगी आग नहीं देखी, बल्कि उन चेहरों की बेबसी भी देखी जो आखिरी पल तक जिंदगी की उम्मीद लगाए खिड़कियों से बाहर झांक रहे थे। उनकी चीखें, मदद की पुकार और अपनों को खोने वालों का विलाप शायद लंबे समय तक लखनऊ की यादों में दर्ज रहेगा।

जानवरों को बचाने की जगह टीवी निकाल रहा था पेट शॉप का मालिक

आग की घटना हुई। पेट शाप में कुछ बिल्लियां समेत अन्य जान मौजूद थे। धुआं देख पेट शाप के मालिक ने उन्हें नहीं निकाला। बल्कि स्टोर के बाहर लगे टीवी को निकालने लगा। घटना बढ़ते देख वह भाग गया। पीछे से कुछ लोगों ने सेंटर में मौजूद दो सिलेंडर बाहर निकाले।

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