वर्षों पुराने वृक्षों को संजोने और कूड़ा प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रयास कर बरेली छावनी परिषद ने पर्यावरण संरक्षण में अहम सफलता अर्जित की है। छावनी परिषद बरेली देश का पहला कार्बन निगेटिव छावनी बन गया है।
टेरी (टीईआरआइ-द एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट) के विज्ञानियों ने छावनी क्षेत्र में हर वर्ष 60,000 टन कार्बन डाइआक्साइड के बराबर कार्बन सोखने की क्षमता (कार्बन सिंक) का दावा किया है।
इसके पीछे क्षेत्र में घने जंगल, विशाल हरित पट्टियां (ग्रीन बेल्ट), वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से हर दिन 35 से 40 टन कचरे से प्रतिदिन ग्रीन एनर्जी (बिजली और बायो-सीएनजी) का उत्पादन कर इसे कार्बन-न्यूट्रल से आगे ले जाकर निगेटिव श्रेणी में लाते हैं।
जल संरक्षण और एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाकर सीवर और नालों के पानी को शोधित किया जा रहा है। टेरी की रिपोर्ट के अनुसार छावनी के पूरे इकोसिस्टम का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया है।
विज्ञानियों की टीम ने जमीन के ऊपर और नीचे मौजूद बायोमास और मिट्टी के नमूनों की जांच की। पाया कि, मिट्टी और घने वृक्षों की उच्च कार्बन सोखने की क्षमता के कारण यह क्षेत्र सालाना 60,000 टन कार्बन डाइआक्साइड वातावरण से कम करता है।
यह मात्रा छावनी द्वारा किए जाने वाले कुल कार्बन उत्सर्जन से कहीं अधिक हैं, जो इसे कार्बन-निगेटिव बनाती है। छावनी परिषद की सीईओ डॉ. तनु जैन के अनुसार नगर निगम और आस-पास के क्षेत्रों से जो प्रदूषित पानी नदियों या तालाबों की ओर जाता है, उसे शुद्ध करने के लिए कैंट बोर्ड ने छह एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाया है, जिससे जलाशयों और नदियों के पानी का शोधन हो रहा।
इससे छावनी क्षेत्र के सरोवर और सभी प्रमुख नालों के पानी को साफ किया जा रहा है। बताया कि, छावनी परिषद द्वारा घरों में पाइपलाइन से बायोगैस (सीबीजी) आपूर्ति की योजना पर काम चल रहा जो पीएनजी का विकल्प बनेगा।
इसके लिए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से उत्पादित हो रही शुद्ध कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) को सीधे पाइपलाइन के जरिए छावनी क्षेत्र के आवासों और सैन्य क्वार्टरों की रसोई से जोड़ने की रूपरेखा बनाई गई है। इससे घरों में उपयोग होने वाले पारंपरिक एलपीजी सिलेंडरों की निर्भरता को कम होगी और कार्बन फुटप्रिंट में और भी भारी गिरावट आएगी।
अन्य छावनी के लिए भी माडल बना बरेली
बरेली कैंट क्षेत्र के कार्बन निगेटिव छावनी बनने को अन्य शहरों व छावनी क्षेत्र में माडल के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश के अन्य बड़े छावनी बोर्ड (लखनऊ, कानपुर और मेरठ) में भी इसी तरह का इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट और टेरी (टीईआरआइ) आधारित कार्बन स्टाक मूल्यांकन शुरू करने पर विचार किया जा रहा।
इस दिशा में स्मार्ट सिटी और सोलर सिटी की पहल पहले से बरेली समेत 17 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने के साथ चल रही है।


