उत्तर प्रदेश का बांदा जिला भीषण गर्मी की चपेट में बना हुआ है। शनिवार को 43.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज होने के साथ बांदा प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा। तापमान में मामूली गिरावट के बावजूद लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल सकी। बढ़ती उमस और मानसून की देरी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बुंदेलखंड क्षेत्र में मानसून का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। शनिवार को बांदा का न्यूनतम तापमान 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम में नमी बढ़ने के बावजूद बारिश नहीं होने से लोगों को गर्मी और उमस की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
जून के पहले और दूसरे सप्ताह में बांदा का तापमान कई बार 47 से 48 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी का असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं और लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
शनिवार को सुबह से ही तेज धूप ने लोगों को परेशान किया। दोपहर होते-होते सूरज की तपिश और अधिक बढ़ गई, जिससे बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही कम हो गई। शाम के समय आसमान में बादलों की हल्की आवाजाही देखने को मिली, लेकिन बारिश नहीं होने से उमस और बढ़ गई।
गर्मी से राहत पाने के लिए लोग शीतल पेय, जूस, शिकंजी और आइसक्रीम का सहारा लेते नजर आए। शहर के कई इलाकों में ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर दिनभर भीड़ बनी रही।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। इससे जुताई और बुवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। पशुपालकों को भी पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. दिनेश शाहा के अनुसार क्षेत्र में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं। वातावरण में नमी बढ़ रही है और बादलों की आवाजाही भी हो रही है, लेकिन व्यापक बारिश के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। तब तक लोगों को गर्मी और उमस की स्थिति का सामना करना होगा।


