सोमवार दोपहर करीब 2 बजे चेन्नई के पेरुंगुडी डंपयार्ड (कचरा डंपिंग ग्राउंड) में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते लैंडफिल से काले धुएं का एक बड़ा और घना गुबार आसमान में उठने लगा, जिसे दूर-दूर से देखा जा सकता था।
ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (GCC) के अधिकारियों ने बताया कि आग दिखते ही तुरंत एक्शन लिया गया। मौके पर तैनात स्टैंडबाय (आपातकालीन) गाड़ियों को तुरंत काम पर लगाया गया, जिसमें फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी, दो पानी के टैंकर और दो जेट-रोडिंग गाड़ियां शामिल थीं।
अधिकारियों के मुताबिक, आग करीब 70 मीटर लंबी और 25 मीटर चौड़ी पट्टी में फैल गई थी। लेकिन फायर ब्रिगेड और निगम की टीमों ने तेजी से काम करते हुए शाम तक इसके 75% हिस्से को बुझा दिया और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया। निगम कमिश्नर जीएस. समीरन ने खुद देर शाम मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
क्यों लगती है डंपयार्ड में बार-बार आग?
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ठोस कचरा प्रबंधन) विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कचरे के ढेरों में सालों पुराना कबाड़ जमा होने से मीथेन गैस बनती है। इस गैस की वजह से यहां अक्सर आग सुलग जाती है। गर्मियों के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि तेज धूप, गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग बहुत तेजी से फैलती है।
ऐसे में 10 दिनों के भीतर चेन्नई के डंपयार्डों में आग लगने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले पल्लिकरनई के पुराने डंपयार्ड में भी एक बड़ी आग लगी थी, जिसे बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।
अब सुरक्षा के लिए किए जाएंगे ये 4 बड़े इंतजाम
बता दें कि बार-बार होने वाले इन हादसों को रोकने के लिए चेन्नई नगर निगम ने अब पेरुंगुडी और कोडुंगयूर डंपयार्डों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने का फैसला किया है।
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नए वॉटर संप- पेरुंगुडी में पहले से 2 लाख लीटर और कोडुंगयूर में 1.2 लाख लीटर की पानी की टंकी है। अब निगम इन दोनों जगहों पर 2-2 लाख लीटर की क्षमता वाले अतिरिक्त अंडरग्राउंड वॉटर संप (पानी की टंकियां) बनाएगा ताकि आग बुझाने के लिए पानी की कमी न हो।
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हाई-पावर पंप- पानी को तेजी से फेंकने के लिए इन टंकियों में 50 हॉर्सपावर (HP) के सबमर्सिबल इलेक्ट्रिक पंप लगाए जाएंगे।
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फायर अलार्म सिस्टम- डंपयार्ड में जरा सी भी आग लगते ही तुरंत पता चल सके, इसके लिए खास फायर अलार्म सिस्टम लगाए जाएंगे।
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स्टैंडबाय गाड़ियां- पल्लिकरनई की घटना के बाद से ही दोनों लैंडफिल साइटों पर कम से कम 6 गाड़ियां हमेशा तैनात रखी जा रही हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
निगम अधिकारियों का क्या कहना है?
वहीं इस मामले में निगम अधिकारियों का कहना है कि इन सभी नए कामों के लिए जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे। इन उपायों का मकसद सिर्फ एक ही है—आग को शुरुआत में ही पकड़कर तुरंत काबू पा लिया जाए, ताकि वह बड़े हादसे का रूप न ले सके।


