बांका में लहलहाई मूंग की खेती: बैशाख की आफत के बाद जेठ की धूप ने बदला भाग्य, इस फसल के मुरीद हुए बांका के किसान

बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड क्षेत्र में इस बार मूंग की खेती ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस सीजन में प्रखंड क्षेत्र की कुल 662 एकड़ भूमि पर मूंग की बुवाई की गई है। फिलहाल मौसम के अनुकूल रहने से स्थानीय किसानों के चेहरे खिले हुए हैं और उन्हें इस बार मूंग की बंपर पैदावार होने की पूरी उम्मीद जगी है। इन दिनों सुबह और शाम के वक्त खेतों में किसान और महिला मजदूर बड़े पैमाने पर मूंग की फलियां तोड़ने (तुड़ाई) में व्यस्त हैं।

जेठ की तपती गर्मी ने सुधारी मूंग की सेहत

खेतों में काम कर रहे प्रगतिशील किसान रामानंद यादव और महेंद्र मंडल ने बताया कि अगर आने वाले कुछ दिनों तक मौसम ने इसी तरह साथ दिया, तो इस वर्ष मूंग का उत्पादन पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि बैशाख के महीने में हुई असमय बारिश ने फसल को लेकर हमारी चिंता काफी बढ़ा दी थी, लेकिन बाद में जेठ की तेज गर्मी ने फसल को पूरी तरह संभाल लिया और फलियां अच्छे से पक गईं।

वहीं, चार एकड़ में मूंग की खेती करने वाले किसान रंजीत सिंह और विजय सिंह ने बताया कि शुरुआती दौर में नुकसान की आशंका जरूर थी, लेकिन बाद में मौसम पूरी तरह अनुकूल हो गया। हालांकि, क्षेत्र के कुछ किसानों ने यह शिकायत भी की है कि कतिपय इलाकों में पौधों में पत्तियां अधिक आ गई हैं और उस अनुपात में दाने थोड़े कम बैठे हैं।

खेतों की ‘उर्वरा शक्ति’ बढ़ाता है मूंग: प्रखंड कृषि पदाधिकारी

मूंग की खेती के फायदों को लेकर प्रखंड कृषि पदाधिकारी संकेत तिवारी ने किसानों को महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मूंग की खेती किसानों के लिए सिर्फ आर्थिक रूप से ही लाभकारी नहीं है, बल्कि यह जमीन के स्वास्थ्य के लिए भी वरदान है।

कृषि पदाधिकारी के अनुसार, दलहनी फसल होने के कारण मूंग के पौधों की जड़ें हवा से नाइट्रोजन सोखकर मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति (फर्टिलिटी) प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है। इसका सीधा और बेहद सकारात्मक प्रभाव इसके बाद आने वाली खरीफ फसलों (जैसे धान) के उत्पादन पर पड़ता है।

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