रक्तदान को महादान कहा जाता है। यह एक छोटा-सा स्टेप हर साल अनगिनत लोगों की जिंदगी बचाता है। इसलिए ब्लड डोनेशन को इतना प्रोत्साहित किया जाता है। हालांकि, इसके बावजूद लोग सिर्फ इसलिए ब्लड डोनेट करने से कतराते हैं, क्योंकि उनके मन में इससे जुड़ी कई तरह की गलतफहमियां बैठी हुई हैं।
वर्ल्ड ब्लड डोनर डे पर इन्हीं गलतफहमियों को दूर करने के लिए हमने डॉ. लेफ्टिनेंट कर्नल सुमित लवानिया (सीनियर कंसलटेंट और एचओडी, मेडिसिन विभाग, यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा) से बात की। आइए जानें वे इस बारे में क्या कहते हैं।
क्या ब्लड डोनेट करने से शरीर में लंबे समय के लिए कमजोरी या थकान आ जाती है?
जवाब- यह ब्लड डोनेशन से जुड़ा सबसे बड़ा मिथक है। सच्चाई यह है कि हमारा शरीर दान किए गए खून की मात्रा की भरपाई बहुत ही कम समय में खुद ही कर लेता है। ज्यादातर हेल्दी लोग ब्लड डोनेट करने के सिर्फ एक दिन बाद ही अपने नॉर्मल रूटीन पर वापस लौट आते हैं। डोनर्स को बस यह सलाह दी जाती है कि वे ब्लड डोनेशन के बाद थोड़ी देर आराम करें और भरपूर मात्रा में फ्लूएड्स लें।
क्या खून देने में बहुत ज्यादा दर्द होता है और इसमें बहुत वक्त लगता है?
जवाब- बिल्कुल नहीं। ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया में आपको सिर्फ उसी पल हल्का-सा दर्द महसूस होता है जब एक छोटी सी सुई चुभाई जाती है। यह डिसकम्फर्ट भी सिर्फ कुछ सेकंड के लिए होती है। इसके अलावा, पूरी ब्लड डोनेशन प्रक्रिया को पूरा होने में 15 मिनट से भी कम का समय लगता है।
क्या ब्लड डोनेट करने से कोई व्यक्ति बीमार पड़ सकता है?
जवाब- यह बात पूरी तरह से गलत है। सभी ब्लड डोनेशन सेंटर्स पर सुरक्षा के कड़े नियमों का पालन किया जाता है। हर डोनर के लिए केवल एक बार इस्तेमाल होने वाले और पूरी तरह स्टेराइल उपकरणों का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए, ब्लड डोनेशन के दौरान किसी भी तरह की बीमारी या इन्फेक्शन फैलने का कोई खतरा नहीं होता है।
अगर किसी की उम्र ज्यादा है, तो क्या वे खून नहीं दे सकता?
जवाब- लोगों के मन में यह गलत धारणा है कि किसी बीमारी या ज्यादा उम्र के कारण वे ब्लड डोनेट नहीं कर सकते। जब तक कोई व्यक्ति मेडिकल पॉइन्ट ऑफ व्यू से स्वस्थ है और वजन, हीमोग्लोबिन व मेडिकल हिस्ट्री की शर्तों को पूरा करता है, तब तक वह उम्र की चिंता किए बिना ब्लड डोनेट कर सकता है।
क्या शाकाहारी लोग या दुबले शरीर वाले लोग ब्लड डोनेट नहीं कर सकते?
जवाब- यह भी सिर्फ एक गलतफहमी है। जब तक कोई व्यक्ति स्वास्थ्य से जुड़ी गाइडलाइन को पूरा करता है, तब तक उसे ब्लड डोनेट करने के लिए पूरी तरह योग्य माना जाता है।


