गया जिले के डोभी प्रखंड क्षेत्र में प्रस्तावित अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। परियोजना से संबंधित तैयारियों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
अधिग्रहीत जमीन का समतलीकरण शुरू हो गया है। करीब 1670.22 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना से क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी तथा लगभग एक लाख लोगों के लिए रोजगार मिलने की उम्मीद है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी
यह परियोजना भारत सरकार के द्वारा विकसित किया जा रहा है। परियोजना स्थल डोभी प्रखंड के खरांटी पंचायत के तेरह राजस्व गांवों में फैला हुआ है। इनमें अमारुत, मंगरुचक, बरिया, गंजीचक, खरांटी, सुगासोत, मंझौली सहित अन्य गांव शामिल हैं।
औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है तथा विभिन्न विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां भी प्राप्त की जा चुकी हैं।
आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र होगा विकसित
परियोजना के तहत आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जहां खाद्य प्रसंस्करण, तकनीकी उपकरण निर्माण, इंजीनियरिंग, लाजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग तथा अन्य औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जाएगी।
इसके अलावा कौशल विकास केंद्र, अस्पताल, होटल, जिला एवं सामुदायिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा, जिससे यह क्षेत्र एक आधुनिक औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो सके। परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी भी मिल चुकी है।
दो कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट होंगे स्थापित
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल जल आवश्यकता लगभग 37.41 एमएलडी आंकी गई है, जिसमें पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। प्रारंभिक चरण में 14.02 एमएलडी औद्योगिक उपयोग तथा 6.36 एमएलडी घरेलू उपयोग के लिए जल की व्यवस्था की जाएगी।
अपशिष्ट जल के उपचार के लिए दो कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 14.50 एमएलडी होगी।
इसके साथ ही शोधन किए गए जल के पुनः उपयोग की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए सरकार ने पैसा स्वीकृत कर दी है। औद्योगिक क्षेत्र को मजबूत आधारभूत संरचना से जोड़ा जाएगा।
नई सड़कों का निर्माण प्रस्तावित
परियोजना स्थल से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर जीटी रोड एनएच-19 स्थित है, जबकि एनएच-22 भी निकट से गुजरता है। दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने के लिए नई सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। जिसमें एक सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
रेल संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए भारतीय रेलवे स्टेशन से परियोजना क्षेत्र तक कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। भविष्य में माल ढुलाई के लिए रेलवे साइडिंग और लाजिस्टिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
स्थापित होगा 162 एमवीए विद्युत क्षमता का ट्रांसमिशन
ऊर्जा आपूर्ति के लिए 34 टीपीडी क्षमता के आईएमसी आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की योजना बनाई गई है। इसके अतिरिक्त 162 एमवीए विद्युत क्षमता सुनिश्चित करने के लिए बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड एवं साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के माध्यम से आवश्यक व्यवस्था की जा रही है।
परियोजना क्षेत्र में भूमिगत विद्युत नेटवर्क तथा आधुनिक वितरण प्रणाली विकसित की जाएगी। परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 1339.02 करोड़ रुपये बताई गई है।
भूमि उपयोग के अनुसार क्षेत्र का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक इकाइयों, 18 प्रतिशत सड़क एवं पार्किंग, 20.30 प्रतिशत हरित क्षेत्र, जबकि शेष भाग सार्वजनिक उपयोगिताओं, आवासीय सुविधाओं और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए आरक्षित रहेगा। हरित क्षेत्र के विकास पर विशेष जोर दिया गया है ताकि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
रुकेगा बेरोजगारों का पलायन
परियोजना के शुरू होने से गया, डोभी और आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए अवसर मिलेंगे। प्रशासनिक सूत्र के अनुसार निर्माण एजेंसियों द्वारा धरातल पर कार्य शुरू कर दिया गया है।
सबसे पहले बिजली, पानी और सड़क का विकास किया जाएगा। अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर के तहत विकसित होने वाला यह औद्योगिक क्षेत्र दक्षिण बिहार के विकास का नया केंद्र बन सकता है।
एक नजर आंकड़ों पर
- अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर का क्षेत्र – 1670.22 एकड़ में
- परियोजना की कुल अनुमानित लागत- लगभग 1339.02 करोड़ रुपये
- परियोजना स्थल से सात किलोमीटर की दूरी पर जीटी रोड एनएच-19 एवं एनएच- 22
- कुल जल की आवश्यकता- लगभग 37.41 एमएलडी
- औद्योगिक उपयोग – 14.02 एमएलडी
- घरेलू उपयोग- 6.36 एमएलडी
- कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट- 2 (कुल क्षमता 14.50 एमएलडी)
भूमि का उपयोग
- औद्योगिक इकाइयों के लिए- 55 प्रतिशत
- सड़क एवं पार्किंग- 18 प्रतिशत
- हरित क्षेत्र – 20.30 प्रतिशत


