ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के भवन निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अस्पताल का पूरा भवन स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाया गया है।
इतना ही नहीं, जिस आईसीयू (ICU) वार्ड में पिछले दिनों भीषण आग लगी थी, वह हिस्सा भी पूरी तरह अवैध रूप से निर्मित है। अगलगी की घटना के बाद एडीएम (आपदा प्रबंधन) के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय जांच टीम ने बुधवार को जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें इन गंभीर गड़बड़ियों की पुष्टि की गई है।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद डीएम के निर्देश पर नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस भेजा है। नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर भवन के अवैध हिस्से को ध्वस्त करने के साथ ही भारी जुर्माना लगाने की तैयारी है।
अस्पताल प्रबंधन ने छुपाया नक्शा
घटना के बाद से ही नगर निगम की टीम अस्पताल भवन के नक्शे की तलाश कर रही थी। प्रबंधन को नक्शा उपलब्ध कराने का नोटिस भी दिया गया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इसे छुपाए रखा और निगम को सौंपने से कतराता रहा।
इसके बाद नगर निगम ने तीन दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद मंगलवार को अपने पुराने रिकॉर्ड रूम (स्टोर) से मूल नक्शा खोज निकाला।रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2011 में इस अस्पताल के लिए ‘जी प्लस फोर’ (G+4) भवन का नक्शा पास हुआ था।
लेकिन नियमों को ताक पर रखकर पहले ‘जी प्लस फाइव’ (G+5) बिल्डिंग खड़ी कर दी गई। इसके बाद बिना किसी प्रशासनिक स्वीकृति के भवन का और ज्यादा विस्तार कर लिया गया।
जिस ICU में गई 7 जान वह भी अवैध
जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार, 4 जून को अस्पताल की जिस आईसीयू में आग लगी थी, वह हिस्सा स्वीकृत नक्शे का भाग ही नहीं था। मालूम हो कि इस हादसे में दम घुटने और झुलसने से 7 मरीजों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य का इलाज अब भी चल रहा है।
घटना के वक्त आईसीयू में 27 मरीज भर्ती थे। परिजनों ने आरोप लगाया था कि आग लगते ही अस्पताल के कर्मचारी मरीजों को तड़पता छोड़ मौके से भाग खड़े हुए थे।
फायर सेफ्टी में भी भयानक लापरवाही
जांच रिपोर्ट में अस्पताल की अन्य तकनीकी और सुरक्षात्मक कमियों को भी उजागर किया गया है:
- सिस्टम रहे फेल: घटना के वक्त अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह काम नहीं कर रहा था।
- हाइड्रेंट खाली: आईसीयू वार्ड में आग बुझाने के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं लगा था और वॉटर हाइड्रेंट में पानी तक नहीं था।
- अप्रशिक्षित स्टाफ: अस्पताल के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) चलाने की ट्रेनिंग नहीं थी। उन्होंने आईसीयू के भीतर ‘एबीसी’ पाउडर का छिड़काव कर दिया, जो वेंटिलेटर और ऑक्सीजन पर चल रहे मरीजों के फेफड़ों के लिए जानलेवा साबित हुआ।
लापरवाही की इंतहा को देखते हुए फायर विभाग ने अस्पताल का फायर एनओसी (NOC) रद्द करने की अनुशंसा की है, वहीं सिविल सर्जन ने अस्पताल का लाइसेंस पहले ही निलंबित कर दिया है।


