आंबेडकर यूनिवर्सिटी में बनेगी एयर लैब: आगरा, मथुरा और इटावा के प्रदूषक तत्वों पर होगा अध्ययन; नॉलेज सेंटर भी बनेगा

 डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय को आगरा, मथुरा और इटावा के वातावरण में प्रदूषक तत्वों के कारकों पर अध्ययन करने के लिए रीजनल नाॅलेज सेंटर बनाया गया है। इन तीनों जिलों से नमूने एकत्रित करने और अध्ययन करने के लिए विश्वविद्यालय में एयर लैब भी स्थापित की जाएगी।

लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में बुधवार को डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्राेजेक्ट अथारिटी (यूपीसीएएमपी) एमओयू किया गया।

उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्राेजेक्ट अथाॅरिटी द्वारा प्रदेश भर में 17 रीजनल नाॅलेज सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इसमें से एक सेंटर आगरा में स्थापित होने जा रहा है।

विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी और पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय को आगरा, मथुरा और इटावा क्षेत्र के प्रदूषण पर नजर रखने के लिए रीजनल नालेज सेंटर बनाया गया है। इसके तहत विश्वविद्यालय में मिनी सुपर साइट लैब स्थापित की जाएगी।

इसमें वास्तविक समय में प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाने में मदद करेगी, जिससे पीएम2.5, धातुओं और अन्य हानिकारक कणों की सटीक जांच हो सकेगी। विश्वविद्यालय की टीम इन तीनों जिलों से प्रदूषक तत्वों के नमूने लेगी, इन नमूनों को एकत्रित करने में लैब की मदद ली जाएगी।

नमूनों में प्रदूषक तत्व के कारकों का पता लगाने के लिए एमएमयू, अलीगढ़ भेजा जाएगा। जिससे यह पता चल सकेगा कि प्रदूषक तत्व किस कारण से बढ़ रहे हैं। यह प्रदेश में सिर्फ चार स्थानों पर होगी। प्रोजेक्ट की फंडिंग विश्व बैंक द्वारा की जाएगी।

कुलपति प्रो. आशु रानी का कहना है कि विश्वविद्यालय लंबे समय से प्रदूषण के क्षेत्र में शोध कार्य कर रहा है। रीजनल नाॅलेज सेंटर के तहत विश्वविद्यालय परिसर में एयर लैब स्थापित की जाएगी, जो वायु प्रदूषण के नमूनों का सघन विश्लेषण करेगी।

नाॅलेज सेंटर के तहत पाठ्यक्रम भी संचालित लिए जाएंगे। यह पाठ्यक्रम आईआईटी के द्वारा डिजाइन किए जाएंगे। एमओयू के दौरान यूपीसीएएमपी बी चंद्रकला, प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा, प्रो.मोहम्मद अरशद मौजूद रहे।

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