आम अमरोहा की पहचान का आधार है। इसकी वजह भी है, बाजार की दुनिया में अमरोहा इसी नाम की वजह से जाना पहचाना जाता है। एक जनपद एक उत्पाद में शामिल होने के बाद अमरोहा के आमों की दुनियाभर में धूम है। मैंगो पैकहाउस की स्थापना का फायदा आम निर्यातक उठा रहे हैं।
आधी रात के बाद पहली बार मंडी समिति परिसर स्थित मैंगो पैकहाउस से 14 टन आम से लदा कंटेनर दुबई के लिए रवाना किया गया। शाम तक कंटेनर की रवानगी के लिए मंडलायुक्त का इंतजार होता रहा लेकिन, उनके नहीं आने पर मंडी समिति सचिव अरविंद कुमार ने उसको रवाना करवाया।
जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर जमीन पर आम की फसल होती है। इसके चलते ही जनपद को फल पट्टी के नाम से भी पहचाना जाता है। कुल पैदावार में से करीब दो हजार मीट्रिक टन आम दूसरे राज्यों व विदेश भेजा जाता है। मैंगो पैकहाउस नहीं होने की वजह से पहले कई क्विंटल आम खराब हो जाता था।
मगर, जिले में 14 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटिड मैंगो पैकहाउस का निर्माण हुआ था। 17 जून 2023 में उसका शुभारंभ किया गया था। उसके बाद से हर साल उत्पादक व निर्यातक देश व विदेश भेज रहे हैं। मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी ने पहली बार दुबई के लिए आम का कंटेनर मैंगो पैक हाउस से भिजवाया है।
उन्होंने बताया कि कंटेनर की रवानगी के लिए मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को करनी थी लेकिन, मोहर्रम के जुलूस की वजह से वह नहीं आ पाए थे। इसके चलते रात करीब दो बजे कंटेनर को दुबई के लिए मंडी सचिव ने रवाना किया। कंटेनर में सात टन दशहरी व सात टन लंगड़ा आम था। कृषि वैज्ञानिकों की मौजूदगी में कंटेनर की रवानगी करवाई गई।
हवाई जहाज से भिजवाया 2200 किलोग्राम आम
कंटेनर के अलावा अमरोहा का दशहरी व लंगड़ा आम हवाई सफर के जरिए भी दुबई भिजवाया गया है। आम निर्यातक नदीम सिद्दीकी ने बताया कि 2200 किलो ग्राम आम हवाई जहाज से भी दुबई भिजवाने का कार्य किया गया है। इसमें 1100 किलोग्राम आम दशहरी व 1100 किलोग्राम लंगड़ा आम शामिल है।
इन देशों में जाता अमरोहा का आम
सऊदी अरब, जापान, स्पेन, दुबई, सिंगापुर, मलेशिया, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, ईरान, उजबेकिस्तान, इटली, जर्मनी, हालैंड, नेपाल व लंदन तक आम निर्यात किया जाता है। इसके अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड आदि राज्यों में भी अमरोहा का आम भेजा जाता है।
जिले के बागों में आम की ये प्रजातियां होती हैं
दशहरी, चौसा, लंगड़ा, बंबईया, फजरी, समर बहिश्त, सुर्खा, हुस्नआरा, अल्फांसो, कट्ठा, तोतापरी, लखनवी सफेदा, बनारसी लंगड़ा, मलिहाबादी दशहरी, मकसूस, आम्रपाली।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

